उधवा में ट्रैक्टरों का हो रहा अनियंत्रित परिचालन, चपेट में आने से एक वर्ष में गयी सात लोगों की जान

राधानगर थाने के विभिन्न हिस्सों में सड़क पर चलना बन गया है काल

उधवा

राधानगर थाने के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क पर चलना काल बन गया है. ट्रैक्टरों ने कई बच्चों को यतीम व कई मांओं की गोद सुनी कर दी है. ग्रामीण सड़कों पर बेखौफ सरपट दौड़ता ट्रैक्टर राह चलते को लोगों को चपेट में ले लेता है. खासकर दियारा क्षेत्रों में. अधिकतर घटना इस क्षेत्र में सामने आ रही है. मिट्टी लदे ट्रैक्टर दिन-रात 24 घंटे सरपट दौड़ता नजर आ रहा है. दियारा के गंगा किनारे मिट्टी खनन कर इन ट्रैक्टरों के माध्यम से उधवा व बरहरवा के विभिन्न चिमनी भट्ठों में सप्लाई होता है. बता दें कि उधवा में एक साल में मिट्टी लदे ट्रैक्टरों से सात लोगों की मौतें हो चुकी है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं. स्थानीय प्रशासन की ओर से इन पर ठोस कार्रवाई नहीं दिख रहा है और ना ही इन ट्रैक्टर चालकों में किसा का खौफ है. थाना क्षेत्र में बीते एक साल का आंकड़ा देखा जाए तो सर्वाधिक मामला अवैध मिट्टी लदे वाहनों से हुआ है. दर्दनाक मौत के आंकड़ों में छोटे मासूम बच्चे, युवक समेत बुजुर्ग महिला भी शामिल हैं. जनवरी 2025 से इस वर्ष मार्च 2026 तक पियारपुर, उत्तर पलासगाछी, पूर्वी उधवा सहित अन्य पंचायत क्षेत्रों में दुर्घटना में मौतें हुई है.

लगातार हो ही घटनाओं से दियारा क्षेत्रों के लोग आक्रोशित हैं

लगातार हो रही इन घटनाओं से दियारा क्षेत्र के लोग आक्रोशित हैं. बताते है कि इन मिट्टी लदे ट्रैक्टर सड़क पर बेखौफ होकर सरपट दौड़ता नजर आ रहे है. मिट्टी माफियाओं के खिलाफ प्रशासन को ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता है. इन मिट्टी माफियाओं को पुलिस प्रशासन का न तो डर है और ना ही दुर्घटना होने की, जब घटना होती है तब खाना पूर्ति के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाती है. इसके पश्चात कुछ दिनों के बाद स्थिति ज्यों का त्यों हो जाती है. मिट्टी माफियाओं की लापरवाही से हुई मौत से उधवा में गम का माहौल है. अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने में भी भय महसूस करते हैं. ये मिट्टी माफिया मिट्टी खनन कर चिमनी भट्ठा व बंगला भट्ठों में ऊंचे दामों पर बेचकर मालामाल हो रहे हैं. उधवा प्रखंड के दियारा क्षेत्रों यानी गंगा किनारे के क्षेत्रों में पिछले तीन माह से लगातार दिन-रात मिट्टी का अवैध खनन व परिचालन जारी है. गांव में धूलकण से स्थानीय लोग परेशान हैं. साथ ही सड़कें भी जर्जर हो रही हैं. कई ट्रैक्टर चालक ऐसे भी हैं, जो निर्धारित उम्र से कम है. इन्हें रोड सेफ्टी के नियमों की जानकारी भी नहीं है. दुर्भाग्य की बात यह है कि इतनी घटना होने के बावजूद प्रशासन मौन रहता है.

01 मार्च 2025 से 17 मार्च 2026 तक मालवाहक वाहनों की चपेट में हुई दर्दनाक मौत

केस स्टडी-01

5 मार्च को उधवा-सिरासिन मुख्य सड़क सिंह जी आम बागान के पास ट्रैक्टर की चपेट में आने से रफीक शेख की मौत, एक अन्य साथी गंभीर रूप से घायल

केस स्टडी-02

27 अप्रैल को अमानत फिरोज बिल्डिंग के पास मिट्टी लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक वर्षीय मासूम बच्ची की मौत, मां गंभीर रूप से घायल

केस स्टडी-03

एक मई 2025 को उत्तर पलासगाछी पंचायत के नजरुल टोला मस्जिद के निकट ट्रैक्टर की चपेट में आने से चार वर्षीय बच्ची की मौत

केस स्टडी-04

11 अक्तूबर 2025 की अहले सुबह पूर्वी उधवा पंचायत जंगलपाड़ा में ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाइक सवार मछली कारोबारी की मौत

केस स्टडी-05

27 जनवरी 2026 को उत्तर पियारपुर में बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक नौ वर्षीय बालक की मौत.

केस स्टडी-06

10 मार्च 2026 को नाशघाट-प्राणपुर आरइओ सड़क अकुंबन्ना के समीप मिट्टी लदे ट्रैक्टर से एक वृद्ध महिला की दर्दनाक मौत, जबकि एक गंभीर रूप से घायल.

केस स्टडी-07

17 मार्च की अहले सुबह कचहरी पुल-पियारपुर आरइओ सड़क पर नया टोला में चिप्स लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाइक सवार युवक (35 वर्ष) की घटनास्थल पर ही मौत.

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Published by: Abdhesh singh

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