बरहरवा में मेंटनेंस के अभाव में 19 माह से जलापूर्ति ठप

बरहरवा की चार व पतना की दो पंचायतों के आधे दर्जन से अधिक गांवों में पानी पहुंचाने का उद्देश्य अधूरा

बरहरवा

बरहरवा शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार के द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में स्वीकृत शहरी जलापूर्ति योजना प्रशासनिक लापरवाही के कारण करीब डेढ़ वर्षों से बंद पड़ी है. शहरी जलापूर्ति योजना के तहत योजना की शुरुआत में बरहरवा व पतना के 6 गांवों को जोड़ना था. इस योजना के लिए राज्य सरकार के द्वारा 9 करोड़ 19 लाख 82 हजार रुपये की स्वीकृति दी गयी थी. लेकिन, मेंटनेंस के अभाव में बीते 19 महीनों से यह योजना बंद है. ज्ञात हो कि विभाग लंबे समय से नगर पंचायत बरहरवा को योजना हैंडओवर करने का प्रयास कर रहा है. लेकिन, नपं अधूरी योजना को हैंडओवर लेने के मूड में नहीं है. इस परिस्थिति में इतनी भारी रकम खर्च होने के बाद भी भीषण गर्मी मे लोग पानी के लिये परेशान हैं.

कई गांवों में बिछी है पाइपलाइन

योजना के तहत बरहरवा प्रखंड की चार व पतना प्रखंड की दो पंचायतों के आधे दर्जन से अधिक गांव में पानी पहुंचाया जाना था. जिसके लिये कई गांवों में पाइपलाइन बिछायी गयी है. इस योजना के तहत बरहरवा पूर्वी के 613 बरहरवा पश्चिमी के 870 झिकटिया के 126 रतनपुर के 576 सहित पतना प्रखंड के कई गांवों में पाइपलाइन बिछाकर घरों में पानी का कनेक्शन दिया गया है. वहीं, बरहरवा पूर्वी क्षेत्र में भी पाइपलाइन बिछायी गयी थी, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण वहां जलापूर्ति नहीं की जा सकी है. इसके अलावे इस योजना के तहत जलापूर्ति कार्य में लगे मजदूरों को मानदेय नहीं मिलने के कारण कई बार उनके द्वारा भी आपूर्ति बंद की गयी. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त भी हो गयी है. जिस कारण लोगों को उन स्थानों में पानी नहीं मिल पाती है.

आठ करोड़ से अधिक रुपये की हो गई है निकासी

बरहरवा जलापूर्ति योजना की स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2015-16 में दी गयी थी. विभाग के द्वारा योजना को पूरा करने की संभावित तारीख 30 नवंबर 2019 निर्धारित की गयी थी. लेकिन, विभागीय वेबसाइट में इस योजना को सितंबर 2022 में किया गया. इस योजना के लिये विभाग के द्वारा 919. 82 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी थी. योजना के पूरा होते-होते तीन वित्तीय वर्ष में 822.80 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

संचालन समिति और फंड की कमी की मार झेल रही है योजना

जानकारी के अनुसार योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिये एक संचालन समिति की आवश्यकता है. लेकिन, वर्तमान में कोई भी इस योजना को लेने के लिये आगे नहीं आया है. वहीं, योजना को नियमित रूप से चलाने के लिये विभाग के पास पर्याप्त फंड की भी व्यवस्था नहीं है. इस कारण योजना अधर में अटकी हुयी है.

कहते हैं स्थानीय लोग

भीषण गर्मी में नगर पंचायत की आम जनता को पानी के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है. लोग घंटों चापाकलों और पानी टंकियों पर नंबर लगाकर पानी भरने को मजबूर हैं. योजना को शीघ्र ही चालू करना चाहिये.

– फोटो- 00, कार्तिक कुमार

योजना की शुरुआत से ही नया बाजार, हाटपाड़ा, कहारपाड़ा, बंगालीपाड़ा, कुलीपाड़ा, विवेकानंदपथ आदि इलाकों के लोगों को जलापूर्ति योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. इसलिये योजना को पुनः चालू तो किया जाये, लेकिन इसमें उक्त मोहल्लों को भी जोड़ा जाये.

– फोटो- 00, निशांत दीप

जलापूर्ति योजना का इतने दिनों से बंद रहना दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि भीषण गर्मी मे शहर के लोग पानी के लिये संघर्षरत हैं. कई मोहल्लों में अभी तक योजना से संबंधित पाइप लाइन नहीं बिछी हैं और पानी भी नहीं पहुंचा है. प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिये.

फोटो- 00, कुंदन भगत

कहती हैं नपं अध्यक्ष

प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजना अधर में अटकी है. इस योजना को पुनः चालू कराने के लिये हम लगातार प्रयासरत हैं. इसके लिए हमने विभाग के अधिकारियों से वार्ता की है. अधिकारियों ने इसी माह योजना को चालू करने की बात कही है.

फोटो- 00, अर्पिता दास, नपं अध्यक्ष

कहते हैं पदाधिकारी

विभाग के जेई विजय मिंज ने कहा कि योजना को चालू करने के लिये विभाग प्रयासरत है. इसे लेकर उच्चाधिकारियों से वार्ता की गयी है. गर्मी को देखते हुये 15 मई तक योजना को चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है.

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Published by: Abdhesh singh

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