चार दिनों से ममता वाहन सेवा ठप, निजी गाड़ियों पर निर्भर मरीज

उधवा में ममता वाहनों की हड़ताल से प्रसव मरीजों की संख्या घटी

उधवा

उधवा प्रखंड में ममता वाहनों की चक्का जाम हड़ताल का असर अब स्वास्थ्य व्यवस्था पर साफ दिखने लगा है. बीते चार दिनों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उधवा में प्रसव मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आयी है. पहले जहां प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रों से ममता वाहनों के माध्यम से प्रसव हेतु मरीज पहुंचते थे, वहीं अब मरीजों को निजी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है. किराया देकर अस्पताल पहुंचना ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है. नौ अप्रैल को ममता वाहन मालिकों ने अनुमंडलीय अस्पताल राजमहल के उपाधीक्षक को तकरीबन 34 माह के बकाया भुगतान को लेकर ज्ञापन सौंपा था. इसमें स्पष्ट कहा गया था कि यदि दस दिनों के भीतर भुगतान नहीं होती है तो बाध्य होकर वाहन संचालन बंद कर दिया जायेगा. इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर 23 अप्रैल को वाहन मालिकों ने संयुक्त रूप से आवेदन देकर संचालन बंद करने का निर्णय लिया. परिणामस्वरूप 24 अप्रैल से उधवा प्रखंड में तकरीबन 18 ममता वाहनों की सेवा पूर्णतः ठप हो गयी है.

लंबे समय से ईंधन, मेंटेनेंस व चालकों का वेतन खुद वहन करने का आरोप

वाहन मालिकों का कहना है कि वे लंबे समय से ईंधन, मेंटेनेंस और चालकों का वेतन खुद वहन कर रहे थे. अब स्थिति ऐसी हो गयी है कि वेतन देना संभव नहीं रह गया है. विभाग से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद बकाया भुगतान नहीं हो रहा है. मजबूरी में हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है. चार दिनों से सेवा बंद रहने का सीधा असर प्रसव मरीजों पर पड़ रहा है. स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई और अतिरिक्त खर्च ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. विभाग को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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By ABDHESH SINGH

ABDHESH SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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