साहिबगंज
साहिबगंज महाविद्यालय के रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं एकेडमिक इंचार्ज डॉ. अनिल कुमार ने 17 से 19 मार्च तक आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आइसीएफए 2026 में अपने शोध पत्र का आभासी माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया. यह सम्मेलन महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार में आयोजित किया गया, जिसका निर्देशन डॉ. देवदत्त चतुर्वेदी ने किया. डॉ. अनिल कुमार ने अपने शोध पत्र में एलोवेरा जेल के सूखे पाउडर में पाये जाने वाले जैव-सक्रिय अणुओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया. उन्होंने एफटीआइआर और अन्य स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकों के माध्यम से एलोवेरा ड्राई पाउडर में मौजूद बायोएक्टिव मॉलेक्यूल्स का लक्षण-वर्णन किया. वर्तमान में डॉ. कुमार साहिबगंज क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों जैसे एलोवेरा, नीम, चिरोटा और तुलसी पर शोध कार्य कर रहे हैं. इन पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न बायोएक्टिव यौगिकों का कैरेक्टराइजेशन आधुनिक स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीकों के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें आइआइटी धनबाद का सहयोग भी शामिल है. अपने व्याख्यान में उन्होंने एलोवेरा के विभिन्न उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका प्रयोग फार्मास्यूटिकल्स, नेचुरल कॉस्मेटिक्स, फूड प्रिज़र्वेटिव्स, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और वूंड हीलिंग जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है. एलोवेरा जेल में पॉलिसैकेराइड्स, ग्लाइकोप्रोटीन, फेनोलिक यौगिक और अन्य सूक्ष्म घटक पाये जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं. डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि प्रकृति में पाये जाने वाले औषधीय पौधे मानव जीवन के लिए अनमोल हैं और भविष्य में इन प्राकृतिक स्रोतों से विकसित औषधियां मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी. डॉ. कुमार की मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये हैं और कई पुस्तकों की रचना भी की है. इसके अलावा, वे अपने यूट्यूब चैनल डॉ. अनिल कुमार हॉटस्पॉट केमिस्ट्री के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को निःशुल्क शिक्षा भी प्रदान कर रहे हैं. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, नेपाल और भारत के विभिन्न राज्यों से प्रोफेसर, शोधकर्ता और वैज्ञानिकों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये. इस सम्मेलन ने रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नए शोध आयाम विकसित किये और शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की. डॉ. अनिल कुमार की इस उपलब्धि से साहिबगंज महाविद्यालय, साहिबगंज और सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है.
