राजमहल. राजमहल नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर-सात में रेलवे की कीमती जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के खेल ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है. इस कथित हेराफेरी ने स्थानीय भू-माफियाओं की कार्यशैली और लाल कोठी की इस सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की रची गयी पटकथा के पीछे छिपे चेहरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. जानकारी के अनुसार मौजा मालकस्वा, थाना नंबर-86, खाता नंबर-133 और दाग नंबर-700 के तहत आने वाली करीब 25 बीघा 18 कट्ठा 10 धुर जमीन सरकारी पर्चा में अनाबादी के रूप में दर्ज बतायी जा रही है. बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा जमाकर लंबे समय से इसकी खरीद-बिक्री का यह सिलसिला गुपचुप तरीके से चलाया जा रहा था.
इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब स्थानीय लोगों ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया. ग्रामीणों का कहना है कि जमाबंदी नंबर-113 में कई दाग दर्ज हैं और ये सभी दाग सरकारी रिकॉर्ड में अनावादी श्रेणी में आते हैं. इसके बावजूद बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर किस आधार पर कई लोगों के नाम रजिस्टर-टू में दर्ज हो गए, कैसे इस प्रतिबंधित सरकारी जमीन की धड़ल्ले से रजिस्ट्री हो गयी और किस नियम के तहत इसका दाखिल-खारिज भी पूरा कर दिया गया.
रेलवे की सामग्री मिलते ही खुला राज और रुकी निर्माण प्रक्रिया
इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब उक्त विवादित जमीन पर कुछ लोगों ने बकायदा पक्का निर्माण कार्य शुरू कर दिया. खुदाई और निर्माण के दौरान मौके से रेलवे की पुरानी ईंटें और अन्य सामग्रियां बरामद हुईं. जमीन के नीचे से रेलवे की चीजें निकलती देख स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी. स्टेशन मास्टर ने बिना देर किए पूरे मामले से रेलवे के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया, जिसके बाद रेलवे निरीक्षक ने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर काम को तुरंत बंद करवा दिया. अब इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है.
क्या कहते हैं एसडीओ?
रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा और खरीद-बिक्री के मामले में प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है. यदि रेलवे की जमीन की रजिस्ट्री करायी गयी है तो मामले की जांच की जायेगी. रेलवे विभाग द्वारा नियमों के तहत जो भी कार्रवाई की जायेगी, उसमें प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग किया जायेगा. सरकारी और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है. यदि जांच में जमीन की खरीद-बिक्री या अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. रेलवे विभाग की ओर से की जा रही कार्रवाई में प्रशासन हरसंभव मदद करेगा. सदानंद महतो, एसडीओ, राजमहल
क्या कहते हैं सीओ?
रेलवे की जमीन पर कथित कब्जे और खरीद-बिक्री के मामले में अंचल प्रशासन ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है. रेलवे की जमीन की दाखिल-खारिज हुई है या नहीं, इसकी फिलहाल कोई जानकारी उनके पास नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि रेलवे की जमीन की दाखिल-खारिज की गयी है तो इसकी जांच करायी जायेगी. जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी. उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जायेगी. मो युसुफ, सीओ , राजमहल.
क्या कहते हैं आइओडब्ल्यू?
अभी सात लोगों का नोटिस दिया गया है सात दिन के अंदर लाल कोठी खाली करने को कहा है बाकी जमीन को सर्वे कर चिन्हित किया जायेगा उसके बाद कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है.निर्माण कार्य को फिलहाल रोक दिया गया है. जांच के बाद रेलवे नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी. प्रमोद पासवान, आइओडब्ल्यू, रेलवे.
