गुड्डू रजक, मंडरो: मंडरो प्रखंड के आसपास के क्षेत्रों में कर्मा-धर्मा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह से जुड़े इस पर्व को लेकर सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल रहा. बहनों ने भाई की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला उपवास रखा.
निर्जला व्रत रखकर सुनी कर्मा-धर्मा की कथा
पर्व के दौरान बहनें दिनभर व्रत पर रहीं और शाम को पूजा स्थल पर एकत्रित हुईं. झुर के समीप बैठकर महिलाओं ने कर्मा-धर्मा की कथा सुनी. पूजा-अर्चना के बाद पर्व का समापन किया गया.
इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाज और लोक आस्था की झलक देखने को मिली.
पोखर को सजाने में जुटीं बच्चियां
कर्मा पूजा को लेकर छोटी-छोटी बच्चियां भी उत्साह में नजर आयीं. बच्चियों ने पोखर और पूजा स्थल को सजाने में सहयोग किया. पर्व की तैयारियों के दौरान ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक माहौल बना रहा.
झारखंड का प्रमुख लोकपर्व है कर्मा
कर्मा पर्व झारखंड के प्रमुख त्योहारों में शामिल है. यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है. पर्व का संबंध भाई-बहन के प्रेम, प्रकृति और लोक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है.
मान्यता के अनुसार, बहनें इस दिन अपने भाइयों के सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं. झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है.
दूसरे राज्यों में भी मनाया जाता है पर्व
कर्मा पर्व केवल झारखंड तक सीमित नहीं है. पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में भी इसे पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है.
झारखंड में धान की रोपाई पूरी होने के बाद कर्मा पर्व मनाने की परंपरा रही है. इसके साथ लोकगीत, पूजा और सामुदायिक उत्सव की परंपरा जुड़ी हुई है.
