पहले 50-80 फीट पर मिलता था भरपूर पानी, अब 300 फीट बोरिंग के बाद भी नहीं

बरहरवा, पतना व बरहेट में भूजल संकट गहराया, सूखने के कगार पर चापानल-तालाब

पतना

बरहरवा, पतना व बरहेट प्रखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है. कई इलाकों में चापानल से पानी आना कम हो गया है. नदी, नाला और तालाब सूखने लगे हैं. पहाड़ी क्षेत्र से घिरे पतना व बरहेट प्रखंड में मई में ही जलस्तर घटना लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है. पेयजल और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बोरिंग में पानी अधिक गहराई पर मिल रहा है. पहाड़ों के नीचे जहां पहले सालों भर पानी जमा रहता था, अब स्थानों पर झरने, नाला व तालाब भी सूखने के कगार पर हैं. अच्छे जलस्रोत वाले स्थानों पर भी लोग किसी तरह बुनियादी जरूरतें पूरी कर रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी गृहणियों को हो रही है. जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व जहां 50-80 फीट पर भरपूर पानी मिल जाता था. अब कई जगह 200 से 250 फीट तक बोरिंग करानी पड़ती है. कुछ क्षेत्रों में तो 300 फीट बोरिंग के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. वहीं, क्षेत्र की प्रसिद्ध गुमानी नदी का जलस्तर भी घट चुका है. कई जगह पर नदी नाले के रूप में बह रही है. आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के शुरुआत में ही जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी, पानी की मांग में बढ़ोतरी, पानी की बर्बादी और भूजल रिचार्ज का कम होना मुख्य कारण है. घरों में पानी का अनावश्यक उपयोग और खेतों में पारंपरिक सिंचाई पद्धति से दोहन अधिक हो रहा है. कई पुराने तालाब और पोखर में गाद भरने से रिचार्ज नहीं कर पा रहे हैं. वहीं, बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र में प्रतिदिन नयी बोरिंग भी हो रही है, जिससे प्राकृतिक रूप से जलस्तर पर दबाव बढ़ रहा है. हालांकि, क्षेत्र में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद थोड़ी राहत मिली है और कुछ तालाबों, नदी में पानी भरने लगा है.

कहीं 800-1000 फीट पर निराशा तो कहीं 300 फीट में मिला पानी

पतना व बरहेट प्रखंड में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है. बोरना पहाड़ से सटे केसरों गांव के निकट एक स्थान पर करीब 1000 फीट गहरा बोरिंग के बाद भी पानी नहीं निकला. पतना के आमडंडा गड़की के पास 15 मई को बोरिंग की गयी, जहां 800 फीट बोरिंग करने पर नाम मात्र पानी मिला. मोदीकोला गांव में भी एक स्थान पर 800 फीट बोरिंग नाकाम रही. वहीं, बरहेट प्रखंड के सनमनी, पंचकठिया, बरहेट बाजार सहित कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां 300-400 फीट बोरिंग करनी पड़ रही है. पानी के लिए लोग अपनी जमा पूंजी लगा रहे हैं. हालात ये हैं कि कहीं 100 फीट पर भी निराशा हाथ लग रही है तो कहीं 300 फीट में काम चलाऊ पानी मिल रहा है.

भूजल गिरावट पर प्रशासन सतर्क, जल संरक्षण की अपील

भूजल स्तर में गिरावट की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. डीसी, साहिबगंज के निर्देश पर प्रतिदिन खराब चापानलों की मरमत कराई जा रही है. जगह-जगह रेन वाटर हार्वेस्टिंग, डैम, सोकपीट और तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया जा रहा है. नल-जल योजना से लोगों को पानी पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्रों में पानी की समस्या उत्पन्न न हो, इसे लेकर लगातार नजर रखे हुए हैं. और प्रशासन के साथ समन्वय कर रहे हैं. वहीं. ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर टैंकर से जलापूर्ति की व्यवस्था भी की जाती है, लेकिन पानी के दोहन के कारण जलस्तर गिरना लोगों में चिंता का विषय बना हुआ है. आने वाले कुछ वर्षों में स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है. इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से जल संरक्षण में सहयोग की अपील की है.

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Author: ABDHESH SINGH

ABDHESH SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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