प्रतिनिधि, उधवा. उधवा प्रखंड के दियारा क्षेत्रों में बीते दिनों की तुलना में अब बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घटने लगा है. हालांकि कई इलाकों में अभी भी जलजमाव और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है और खतरा पूरी तरह टला नहीं है. प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
प्रखंड के दक्षिण पलासगाछी और पश्चिम प्राणपुर पंचायत के आंशिक क्षेत्र गोलढाब चुआर के अलावा पूर्वी प्राणपुर और श्रीधर पंचायत क्षेत्र में अब भी बाढ़ का असर बना हुआ है. कई जगहों पर पानी जमा होने के कारण ग्रामीणों की परेशानी कम नहीं हुई है.
अफसरों ने बाढ़ प्रभावित गांवों का लिया जायजा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं. इसी क्रम में रविवार को एसडीओ सदानंद महतो, उधवा सीओ आशीष कुमार और बीडीओ जयंत कुमार तिवारी ने गोलढाब चुआर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया.
अधिकारियों ने बानू टोला सहित अन्य प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया. इस दौरान बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया गया.
अधिकारियों ने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और हर संभव प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिया.
जलस्तर और प्रभावित परिवारों पर प्रशासन की नजर
प्रशासन की टीम की ओर से जलस्तर और प्रभावित परिवारों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य किया जाएगा.
एसडीओ राजमहल सदानंद महतो ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. प्रशासन की ओर से लोगों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है.
पश्चिम प्राणपुर में भी राहत सामग्री बांटने की तैयारी
बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए जनप्रतिनिधियों की ओर से भी पहल की जा रही है. पश्चिम प्राणपुर के मुखिया प्रतिनिधि महबूब आलम की ओर से भी प्रभावित ग्रामीणों के बीच राहत सामग्री बांटने की तैयारी की जा रही है.
राहत वितरण के दौरान दक्षिण पलासगाछी पंचायत की मुखिया नफीसा खातून, मुखिया प्रतिनिधि ताजरुल हक, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि अब्दुल हन्नान, वार्ड सदस्य मोनिमुल शेख, सरफराज सहित अन्य लोग मौजूद थे.
कई इलाकों में अब भी बाढ़ का असर
पानी घटने के बावजूद दियारा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ग्रामीणों की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. प्रशासन भी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि जलस्तर बढ़ने या किसी तरह की आपात स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके.
