साहिबगंज मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को शहर के महाजन पट्टी स्थित अनंत कुमार सरस्वती सदन पुस्तकालय भवन में समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान, डॉ विजय कुमार एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर अनंत कुमार सरस्वती सदन के प्लैटिनम जुबली वर्ष पर प्रकाशित पुस्तक का भी विमोचन किया गया.
मुख्य अतिथि डॉ. रामदेव पासवान ने कहा कि किसान, मजदूर, विधवा, दलित, निम्न मध्यम वर्ग, बेरोजगार युवा और छोटे सरकारी कर्मचारी प्रेमचंद की रचनाओं के प्रमुख पात्र रहे हैं. यही कारण है कि उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी है. उन्होंने बताया कि प्रेमचंद ने शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी और 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर सरकारी नौकरी छोड़ दी थी.
डॉ विजय कुमार ने प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने हंस, जागरण, मर्यादा और माधुरी जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया तथा गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदन, रंगभूमि और कर्मभूमि जैसे कालजयी उपन्यास तथा दो बैलों की कथा, पूस की रात, कफन, पंच परमेश्वर और बूढ़ी काकी जैसी प्रसिद्ध कहानियां लिखीं. कार्यक्रम में सचिव सुरेश निर्मल ने बताया कि 1951 में स्थापित अनंत कुमार सरस्वती सदन केवल पुस्तकालय नहीं, बल्कि ज्ञान, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का केंद्र है. समारोह के दौरान स्कूली छात्रों की प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया. इस अवसर पर ललित स्वदेशी, प्रदीप कुमार, गणेश तिवारी, कमल महावर, सुबोध झा, आनंद मोदी, शशी जाजोडिया, रानी झा, तुफैल, कुमार, अनवर अली, चेतन भरतिया, भगवती नारायण पांडेय सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे.
