साहिबगंज : त्योहार काहे का भाई साहब, सब परंपरा का मान निभाना है सो मना लेंगे, जैसे-तैसे वरना, महंगाई तो जान मारने पर आमादा है. दान-पुण्य की तो बात ही छोड़िये. बहन-बेटियों के यहां सौगात के रूप में पले बोरी भर नया चावल, चूड़ा तिलकुट, सिब्जयां व दही भेजते थे.
अब तो झोला भर कर भेजने में ही कमर टूट जाती है. अब लोगों की जुबान से यही पीड़ा निकलती है. महंगाई इस कदर है कि किलो के हिसाब से घरों में आने वाले तिलकुट, तिलवा, लाई, घी आदि सभी चीजें पाव में सिमट कर रह गयी है.
बीते साल की तुलना में इस साल मकर संक्रांति मनाने के लिए सभी जरूरी वस्तुओं की कीमत में 30 से 40 फीसद का इजाफा हो चुका है. आलम यह है कि अब एक थाली अच्छी खिचड़ी के लिए करीब 45 रुपये खर्च करने पड़ेंगे.
