ओके:: घटते जलस्तर व घने कोहरे से बढ़ायी किसानों की चिंताकुहासे से आलू व सरसों की खेती पर पड़ रहा विपरित असर वहीं फूलगोभी तथा बंदगोभी की खेती भी रही प्रभावित10 दिसंबरफोटो संख्या- 08 पाकुड़ से जा रहा हैकैप्सन- खेत में लगी बंदगोभी की फसल प्रतिनिधि, महेशपुर धान की खेती के समय सूखे की मार झेल चुके महेशपुर प्रखंड के कृषकों में ठंड के मौसम में पड़ने वाले कुहासे तथा घटते जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ गयी है. विदित हो कि धान, गेहूं के अलावे सब्जी के उत्पादन में अव्वल रहा महेशपुर वर्तमान में सरकारी सिंचाई सुविधा के अभाव में निजी व्यवस्था के सहारे चल रहा है. देर रात से सुबह तक पड़ रहे कुहासे के कारण जहां एक ओर आलू तथा सरसों की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर फूलगोभी तथा बंदगोभी भी इससे अछूता नहीं रहा है. फसल उत्पादन के आशानुकुल नहीं होने पर कृषकों पर ऋण का बोझ भी बढ़ता है. कृषि वैज्ञानिक की रायइस बाबत कृषि विज्ञान केंद्र महेशपुर के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ विनोद कुमार ने बताया कि कुहासे से प्रभावित आलू की फसल में रेडोमील 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करने पर झूलसा नामक बीमारी से बचाव तथा उत्पादन सही होगा. सरसों की फसल को लाही नामक बीमारी तथा फूलगोभी व बंदगोभी की फसल में मोनोक्रोटोफॉस 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से किसान छिड़काव कर बीमारी पर नियंत्रण पा सकते हैं. साथ ही गेंहू की फसल में जंगली पालक तथा बथुवा का प्रकोप होने पर 2,4-डी- 20 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से प्रथम सिंचाई के 4-5 दिन के बाद जब खेत में नमी रहे, तब छिड़काव करने से नियंत्रण पाया जा सकता है.
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