ओके::सत्संग से ही अहंकार का नाश संभव: सत्यानंद जी फोटो नं 9 एसबीजी 7,8 हैं. कैप्सन: बुधवार को प्रवचन देते बाबा उमड़ी भीड़ संवाददाता, साहिबगंजचैतन्य धाम में आयोजित दो दिवसीय दर्शन दौरा सत्संग के समापन सत्र में बुधवार को पंचम पादशाही परमहंस सत्यानंद ने कहा कि अहंकार एवं निरजता की समाप्ति सत्संग से ही संभव है. लाभ-हानि का विचार अहंकारी करते हैं. जबकि भक्त अपने मालिक सदगुरु के आदेश का पालन करते हैं. राजर्षि जनक जी अष्टावक के आदेश से शासन करते हैं तभी विदेह कहलायें भरत जी राम के आदेश का पालन कर भक्त राज बन गये. मतंग ऋषि के आदेश का पालन कर सबरी आदर्श बन गयी. श्रीकृष्ण के आदेश से अर्जुन ने युद्ध किया था. इसके मल में कुप्रवृतियों का शमन एवं सद्प्रवृति का शासन स्थापित करना था. धर्म की स्थापना के लिए प्रभु प्रत्येक युग में अवतरित होते हैं. वर्तमान के माध्यम से शिष्यों के पूछे प्रश्न का सद्गुरु ने समाहार भी किया. इस दौरान अवध सिंह, ओम प्रकाश जयसवाल, सच्चिदानंद, प्रमोदानंद, माला मिश्रा, शांति देवी, सीमा आनंद, चैतन्य, नीरज, शिवानी, सुधा, सुनील, चंदन, फंटूश, मनोहर आदि मौजूद थे. स्वामी जी का अगला पड़ाव पाकुड़ आश्रम में होगा. जहां वे शनिवार तक रहेंगे. यह जानकारी महात्मा परमेश्वरानंद जी ने दी.
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