प्रवचन :::आत्मसम्मेाहन स्वतंत्र अभ्यासउदाहरण के लिये यदि हम धूम्रपान करते अथवा अधिक खाते हैं तथा इन आदतों को रोकना चाहते हैं तो सर्वप्रथम हमें इस समस्या के मूल कारण तक पहुंचना होगा. सम्मोहन समस्या के केवल बाहरी स्वरूप को ही बदलता है ताकि उसके परिणाम स्वरूप होने वाले तनाव कोई अप्रिय स्थिति अथवा बीमारी का रूप न ले सकें. परंतु मूल समस्या ज्यों की त्यों बनी रह जाती है. इस प्रकार सम्माेहन किसी समस्या के एक निश्चित स्तर को ही प्रभावित कर पाता है. आत्मसम्मेाहन : इसकी प्रक्रिया भी सम्मोहन जैसी है परंतु यह स्वतंत्र अभ्यास है. इसे हम स्वयं अपना कार्यक्रम निर्धारित करते हैं तथा मन को अच्छी तरह देख सकते है. यह भी समस्या के मूल कारण का निराकरण नहीं कर पाता.
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प्रवचन :::आत्मसम्मेाहन स्वतंत्र अभ्यासउदाहरण के लिये यदि हम धूम्रपान करते अथवा अधिक खाते हैं तथा इन आदतों को रोकना चाहते हैं तो सर्वप्रथम हमें इस समस्या के मूल कारण तक पहुंचना होगा. सम्मोहन समस्या के केवल बाहरी स्वरूप को ही बदलता है ताकि उसके परिणाम स्वरूप होने वाले तनाव कोई अप्रिय स्थिति अथवा बीमारी का […]
