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150 वर्षों से हो रही बड़ी काली मंदिर में पूजा 07 नवंबर फोटो संख्या-05-बरहरवा से जा रहा हैकैप्सन-मां काली की वर्तमान रूपप्रतिनिधि, बरहरवाप्रखंड क्षेत्र के कालीतल्ला मुहल्ला स्थित पुरानी बड़ी काली मंदिर में 150 वर्षों से भी अधिक समय से मां काली की पूजा हो रही है. ग्रामीणों ने कहा कि पहले यहां श्मशान था. […]

150 वर्षों से हो रही बड़ी काली मंदिर में पूजा 07 नवंबर फोटो संख्या-05-बरहरवा से जा रहा हैकैप्सन-मां काली की वर्तमान रूपप्रतिनिधि, बरहरवाप्रखंड क्षेत्र के कालीतल्ला मुहल्ला स्थित पुरानी बड़ी काली मंदिर में 150 वर्षों से भी अधिक समय से मां काली की पूजा हो रही है. ग्रामीणों ने कहा कि पहले यहां श्मशान था. यहां मां काली की आराधना क्षेत्र के डाकू करते थे. इसके बाद धीरे-धीरे इस स्थल पर आम लोगों का भी जुड़ाव होने लगा.रानी ज्योतिर्मयी देव्या ने की स्थापना बढ़ती प्रसिद्धि व लोगों की अटूट आस्था को देखते हुए महेशपुर स्टेट की रनी ज्योतिर्मयी देव्या ने सन 1865 में मंदिर की स्थापना की. रानी स्वयं हर महीने की अमावस्या को पहुंच कर माता की पूजा करती थी. होती है मन्नतें पूरीश्रद्धा और भक्ति के साथ जो भी भक्त बड़ी काली मंदिर में माता की आराधना सच्चे मन से करते हैं माता उनके हर मनोकामना को पूर्ण करती है. मनोकामना पूर्ण होने पर भक्तों द्वारा यहां पाठा बलि भी दी जाती है. यहां हर शनिवार व मंगलवार को विशेष आरती का आयोजन किया जाता है.दूर-दराज से आते हैं श्रद्धालुइस मंदिर की ख्याति बरहरवा, पतना, उधवा, राजमहल के अलावा पश्चिम बंगाल व बिहार सहित अन्य क्षेत्रों में भी फैली हुई है. यहां काली पूजा के दिन दूर-दराज से श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना करने आते हैं.वर्तमान में युवा पीढ़ी के जिम्मे है पूजावर्तमान में युवा की समिति द्वारा पूजा का सारा कार्य होता है. हर वर्ष नयी कमेटी का गठन कर पूजा-अर्चना धूमधाम के साथ की जाती है. वर्तमान में पूजा कमेटी के अध्यक्ष सुकोमल राय हैं.

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