बरहरवा : फरजी कॉल व बैंक अधिकारी बनकर तथा लॉटरी का झांसा देकर साइबर अपराधी अब बरहरवा, कोटालपोखर, गुमानी के क्षेत्रों में भोले-भाले लोगों को भी अपना शिकार आसानी से बना रहे हैं.
कोटालपोखर थाना क्षेत्र के पलासबोना गांव निवासी व उत्क्रमित मध्य विद्यालय पलासबोना में कार्यरत पारा शिक्षक तारीर अहमद के बैंक खाते से 12,275 रुपये की निकासी कर ली है. पीड़ित तारीर ने बताया कि 22 सितंबर को 12:30 बजे उनके मोबाइल नं0 9955943484 पर अनजान नं0 8873120027 से कॉल आया. कॉलर अपने आप को बैंक का अधिकारी बताते हुए एटीएम कार्ड को लाइफ टाइम रेनुअल करने की बात कर एटीएम कार्ड नंबर पूछा तो तारीर ने कहा कि मैं अभी विद्यालय में हूं. घर जाकर बताउंगा.
जिसके बाद तारीर के मोबाइल पर पुन: 2:59 बजे कॉल आया. कॉलर ने एटीएम कार्ड नं0 पूछा तो तारीर ने कार्ड नं0 बता दिया एवं मोबाइल में आये 6 अंक का एक मैसेज का नं0 भी उस व्यक्ति ने तारीर से पूछ लिया. जिसके बाद वह युवक ने एटीएम कार्ड लाइफ टाइम रेनुअल करने की बात कही और कहा कि आपके घर में और किसी का एटीएम कार्ड है तो उसका भी नं0 बताएं. जब तक तारीर कुछ समझ पाते तब तक उनके खाता संख्या 30983804192 से 12 हजार 275 रुपये की निकासी कर लिया गया.
थाना में कराया मामला दर्ज
पारा शिक्षक तारीर अहमद ने कोटालपोखर थाना में आवेदन देकर कांड संख्या 220/15 भादवि की धारा 419, 420 व 66 आइटी एक्ट के तहत अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया है.
मोाबइल नं0 की हुई पहचान
तारीर के मोबाइल पर आये नं0 8873120027 की पहचान आइडिया उपभोक्ता कृष्णा सिंह, पिता रामनारायण सिंह, गांव मुरादाबाद, प्रखंड सासाराम व जिला रोहतास के रूप में किया गया है. जिसकी जानकारी लेकर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
लगातार बढ़ रहा साइबर क्राइम
बीते एक अक्तूबर बरहरवा थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय पुर्लिया डांगा में कार्यरत पारा शिक्षक के मोबाइल नं 09572883170 पर एक अंजान कॉल अपने आप को बैंक अधिकारी बताकर 10 किस्तों में उनके खाता संख्या 11548849203 से 37498 रुपये की निकासी कर ली गयी थी. वहीं कुछ माह पूर्व कोटालपोखर थाना क्षेत्र के गांधी मोहल्ला निवासी मामुनि देवी को अपराधियों ने साइबर क्राइम का शिकार बनाते हुए उनसे 44 हजार रुपये ठग लिया था.
बरहरवा,गुमानी व कोटालपोखर के दर्जनों ऐसे और लोग हैं. जिसके मोबाइल नं0 पर अंजान नं0 से संपर्क कर बैंक अधिकारी बताते हुए कार्ड नं0 व पिन नं0 पूछा गया है. लेकिन वे लोग नहीं बताए जिससे वे ठगी के शिकार होने से बच गये.
