अजय झा, देवघर
संताल परगना में काले कारोबारों पर नकेल कसने के लिए अक्सर कच्चे दावे ही किये गये. जिस कारण रोजाना लाखों के राजस्व का चूना सरकार को लगता रहा है. सख्ती हुई, लेकिन ना तो कोयला ना मवेशी की तस्करी और ना अफीम की खेती ही रुकी. नतीजा वही ढाक के तीन पात. हालांकि इन जिलों के एसपी ने समय-समय पर थोड़ी सख्ती अवश्य दिखायी. आंकड़ों पर यदि गौर किया जाय तो पिछले दिनों जामताड़ा में कोयला के कई अवैध खदानों को बंद किया गया, फिर भी कोयला तस्करी जारी है.
वहीं गोड्डा में भी सुंदरपहाड़ी पर अवैध खदानों को भरा गया, जबकि ललमटिया से निकलने वाले कोयले की चोरी अब भी जारी है. लेकिन उंगलियों पर गिने जाने वाले ये कार्रवाई इस कारोबार पर नकेल कसने के लिए नकाफी है. साहिबगंज का इलाका तस्करी का सबसे बड़ा अड्डा है. यह इलाका पश्चिम बंगाल से बिल्कुल सटा हुआ है. तस्कर इस रास्ते से झारखंड के खनिजों व मवेशियों को बंगलादेश भेजने का काम करते हैं.
