राजमहल : सऊदी अरब के मुफ्ती अली इब्ने अब्दुल अजीज सिब्ल द्वारा नवी-ए-करीब सलल्लाहु अलैहेवसल्लम के मजार शरीफ गुंबदे खजरा को तोड ने संबंधी इस्लाम महजब के विरोध में दिये गये विवादित बयान के बाद यहां के मुसलिम धर्मावलंबियों में रोष है.
जुलूसे मोहम्मदी कमेटी राजमहल के नेतृत्व में बुधवार को राजमहल व उधवा प्रखंड के 10 हजार से अधिक की संख्या में इस्लाम धर्मावलंबियों ने मूसलधार बारिश में जुलूस निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया.
जुलूस फुलवरिया चौक से निकलकर राजमहल रेलवे मैदान पंहुची. रेलवे मैदान में क्षेत्र के विभिन्न मौलानाओं ने तकरीर पेश करते हुए सऊदी अरब की हुकूमत से विवादित बयान देनेवाले मुफ्ती को फांसी की सजा देने की मांग की.
शिष्टमंडल ने सौंपा मांग-पत्र
जुलूस के बाद एक शिष्टमंडल ने अपनी मांग को सऊदी हुकूमत तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रपति (भारत सरकार) के नाम एसडीओ विधानचंद्र चौधरी को मांग-पत्र सौंपा. मौके पर मौलाना शमीम अहमद मिस्वाही, मौलाना हाफिज शाहिद रजा, मौलाना नुरूल इस्लाम अशर्फी, झामुमो जिलाध्यक्ष एमटी राजा, उप प्रमुख अनीसुर रहमान, नफील अहमद सहित अन्य मौजूद थे.
क्या है मामला : मौलाना शमीम अहमद मिस्वाही ने बताया के 3 सितंबर को एक उर्दू अखबार में सऊदी अरब के मुफ्ती अली इब्ने अब्दुल अजीज सिब्ल द्वारा नवी-ए-करीम सलल्लाहु अलैहेवसल्लम के मजार शरीफ गुम्बदे खजरा को तोड ने जैसे इस्लाम धर्म की आस्था अकीदत व वजुद को मिटाने वाली विवादित बयान छपी है. इस बयान से इस्लाम धर्म को माननेवाले मुसलमानों की आस्था को काफी चोट पहुंची है. मजार शरीफ गुम्बदे खजरा की इस्लाम धर्म में खास अहमियत है. यह मजार शरीफ अल्लाह ताआला के निशानी में से एक है.
