विकास की बाट जोह रहे टिकेतरी के 400 ग्रामीण

खलारी प्रखंड अंतर्गत चूरी दक्षिणी पंचायत का टिकेतरी गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है

दिनेश पांडेय ”घंटू”, खलारी.

खलारी प्रखंड अंतर्गत चूरी दक्षिणी पंचायत का टिकेतरी गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है. करीब 60 घरों और 400 की आबादीवाले गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. गांव की गलियां खुद अपनी बदहाली की दास्तां सुनाती हैं, तो पेयजल का संकट लोगों के गले सूखा रहा है. ऊपर से बिजली की अनिश्चितता और शिक्षा के गिरते स्तर ने ग्रामीणों को आंदोलन को विवश कर रहा है. ऐसा लगता है मानो समय ने इस गांव को तरक्की के नक्शे से ही मिटा दिया हो, जहां हर दिन का सूरज ग्रामीणों के लिए संघर्ष की एक नयी चुनौती लेकर आता है. गांव के प्रबुद्धजनों और स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर प्रशासनिक उदासीनता का विरोध जताया है और गांव की खस्ताहाल स्थिति को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर जाहिर की है.

गांव में नहीं है चापाकल, कुएं का जलस्तर गया नीचे :

गांव के वीरू गंझू, बूटन मुंडा, लोहा सिंह मुंडा, दामोदर गंझू, शुलेन्द्र गंझू, सूबेदार गंझू, धीरु मुंडा, बब्लू गंझू, संतोष गंझू, मलका मुंडा, वीरेंद्र गंझू, नटु गंझू, मालती देवी, बसंती देवी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक भी चापाकल नहीं है. गर्मी में गांव के सभी कुओं का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. गांव की जरूरत को देखते हुए अलग-अलग समय पर कुल सात सोलर जलमीनार लगाये गये थे, लेकिन देखरेख के अभाव में इनमें से तीन जलमीनार काफी समय से खराब पड़े हैं. वर्तमान में महज चार जलमीनार ही किसी तरह चल रहे हैं, जिससे पूरी आबादी की प्यास बुझना नामुमकिन है.

जर्जर सड़क व बदहाल सरकारी स्कूल :

गांव की मुख्य सड़क जर्जर हो चुकी है. जिससे आये दिन लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं. वहीं, शिक्षा के मंदिर की स्थिति भी दयनीय है. गांव के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय के भवन का दरवाजा टूट चुका है, जिससे स्कूल की सुरक्षा भगवान भरोसे है. बिजली की स्थिति पर ग्रामीणों ने गहरी चिंता जताते हुए बताया कि गांव में बिजली का कनेक्शन तो है, लेकिन बिजली कब आयेगी और जायेगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है. समस्या यह है कि यदि कोई तकनीकी खराबी आ जाये तो गांव के लोग कई-कई दिनों तक अंधेरे में रहने को विवश हो जाते हैं. बिजली नहीं रहने से न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि रातें गुजारना भी दुश्वार हो जाता है.

विधवा व वृद्धा पेंशन में विलंब :

ग्रामीणों ने बताया कि जब से सरकार की मइंया सम्मान योजना शुरू हुई है, तब से गांव के कई लाभार्थियों को मिलनेवाली विधवा और वृद्धा पेंशन की राशि विलंब से मिलती है. इस बार भी दो माह से नहीं मिली है. तकनीकी गड़बड़ी या लापरवाही के कारण गरीब बुजुर्गों और बेसहारा महिलाओं के समक्ष जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने प्रखंड और जिला प्रशासन से टिकेतरी गांव का भौतिक सत्यापन कर समस्याओं का अविलंब समाधान कराने की मांग की है.

16 खलारी 01, बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की बयां करते ग्रामीण.

16 खलारी 02, टिकेतरी गांव की जर्जर सड़कें.B

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लेखक के बारे में

Author: DINESH PANDEY

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