Ranchi News : आज पधारेंगे मंगलमूर्ति, सज गये हैं पूजा पंडाल

गणेश चतुर्थी का पर्व हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इसे विघ्नहर्ता गणेश की आराधना का दिन माना गया है.

गणेश पूजा की तैयारियों में जुटी राजधानी, शहर में कई जगहों पर बने हैं पंडाल

रांची. गणेश चतुर्थी का पर्व हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इसे विघ्नहर्ता गणेश की आराधना का दिन माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन गणपति की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और बाधाओं का नाश होता है. गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना गया है. गणेश चतुर्थी के दिन प्रतिमा स्थापना और 10 दिनों तक पूजन करने का विधान है. पद्म पुराण और गणेश पुराण के अनुसार इस व्रत से सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. 27 अगस्त से शुरू हो रहे गणेशोत्सव को लेकर मंदिरों, पूजा समितियों और घरों में तैयारी की गयी है. इस वर्ष चतुर्थी तिथि 27 अगस्त की दोपहर 2:06 बजे तक रहेगी. गणेश पूजा का यह पर्व अनंत चतुर्दशी छह सितंबर तक चलेगा, जब श्रद्धालु शोभायात्रा के साथ भगवान को विदाई देंगे.

इको-फ्रेंडली भगवान गणेश की प्रतिमा

महावीर मंदिर (डोरंडा), हनुमान मंदिर (हरमू रोड), पंचमुखी गणपति (लालपुर) समेत शहर के बड़े मंदिरों में सजावट की गयी है. लालपुर, मेन रोड, हरमू और रातू रोड इलाकों में पंडालों का निर्माण किया गया है. इस बार कई पूजा समितियां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित कर रही हैं. मिट्टी की प्रतिमा के साथ रंगों में भी प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया गया है.

बाजार में चढ़ा उत्सव का रंग :

लालपुर चौक, अपर बाजार और कांके रोड के दुकानों में रौनक बढ़ गयी है. मूर्तियों, सजावट, वस्त्र और लाइटिंग की खरीदारी जोरों पर है. पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदारों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार मांग अधिक है.

गणपति बप्पा को 101 किलो लड्डू का लगेगा भोग

न्यू स्टार नवयुवक संघ श्री गणेश पूजा समिति, सामलोंग मेलाटांड़ मैदान में गणेश पूजा की जा रही है. पूजा पंडाल का निर्माण किया गया है. झारखंड की संस्कृति की झलक दिखेगी. बुधवार की शाम सात बजे पंडाल का उदघाटन पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो और नगर निगम वाटर बोर्ड के पूर्व चेयमैन सुरेश साहु करेंगे. समिति के सचिव संदीप मेहता ने बताया कि पंडाल के निर्माण में बांस के पत्ते, थर्माकोल, कांच के बॉटल, साइकिल के टायर और नारियल का इस्तेमाल किया गया है. इस पंडाल को बनाने में आठ लाख का खर्च हुआ है, जिसका निर्माण बंगाल के कारीगरों द्वारा किया गया है. गणपति बप्पा को 101 किलो लड्डू का भोग लगाया जायेगा. यह 10 दिवसीय महोत्सव 27 अगस्त से पांच सितंबर तक रहेगा. मेला भी लगाया गया है, जिसमें बच्चों और बड़ों के लिए झूला और खाने-पीने के स्टॉल सजे हैं.

यहां पंडाल निर्माण कर की जा रही पूजा

अमर क्लब गणेश पूजा समिति, हिनू :

12 वर्षों से पूजा हो रही है. इस बार 14 फीट ऊंची प्रतिमा, पांच दिवसीय पूजन. पहले दिन 1001 किलो लड्डू का भोग, दूसरे दिन 1100 लीटर दूध से खीर, तीसरे दिन 501 किलो खिचड़ी, चौथे दिन महाभंडारा और पांचवें दिन शोभायात्रा. आयोजन पर लगभग 12.70 लाख रुपये खर्च होगा.

न्यू आदर्श क्लब, डोरंडा :

27 से 30 अगस्त तक चार दिवसीय उत्सव. आठ फीट की प्रतिमा, 51 फीट ऊंचा पंडाल और आकर्षक लाइटिंग. बंगाल के कलाकारों द्वारा झांकी नृत्य, ताशा पार्टी आकर्षण का केंद्र. उदघाटन किन्नर समाज की गुरु माता सांवरिया नायक करेंगी.

रांची गणेश पूजा समिति, अलबर्ट एक्का चौक :

2015 से हो रहा आयोजन. इस बार 14 फीट की लालबाग के राजा जैसी प्रतिमा. पांच दिवसीय उत्सव में गंगा आरती, कीर्तन मंडली, महाभोग और शोभायात्रा. खर्च लगभग 6.5 लाख रुपये.

गोपाल मोहन गणेश पूजा समिति, अरगोड़ा :

चार दिवसीय आयोजन. लालबाग के राजा के प्रारूप की प्रतिमा अभय मुद्रा में. इस्कॉन द्वारा भजन, महाआरती, हवन और शोभायात्रा. खर्च लगभग तीन लाख रुपये.

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पूजा विधि : सुबह स्नान के बाद गणेश जी की प्रतिमा को उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापित करें. कलश स्थापना के साथ अक्षत, दूर्वा, मोदक, लड्डू और फूल अर्पित करें. गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें और आरती करें.

गणेश ध्यान मंत्र

“शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्.

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये.”

अर्थ : श्वेत वस्त्रधारी, चतुर्भुज, चंद्रमा के समान वर्ण वाले और प्रसन्न मुख वाले गणपति का ध्यान करें ताकि सभी विघ्न दूर हों.

गणेश बीज मंत्र :

ॐ गं गणपतये नमः (इस मंत्र का 108 बार जाप अत्यंत शुभ माना जाता है.)

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Author: KRANTI

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