टाटा स्टील झारखंड लिटरेरी मीट: रांची के आड्रे हाउस में एक मंच पर जुटे साहित्य, कला और खेल जगत के धुरंधर

Jharkhand News: प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि प्रभात खबर आरंभ से ही लिटरेरी मीट से जुड़ा हुआ है. कोविड के कारण मुश्किल दिनों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब हम दोबारा पुराने दिनों की ओर लौट रहे हैं.

Jharkhand News: ‘टाटा स्टील झारखंड लिटरेरी मीट’ के तहत रांची के ऑड्रे हाउस में साहित्यकारों, कवियों, हास्य कलाकारों, शास्त्रीय नृत्य के महारथियों, खेल व पत्रकारिता जगत के धुरंधरों का महाजुटान हुआ. शनिवार से शुरू इस दो दिवसीय आयोजन में ‘प्रभात खबर’ सहयोगी है. इसमें झारखंड की स्थानीय भाषा के साहित्य पर विमर्श से लेकर स्टैंडअप कॉमेडी तक का मंचन हो रहा है. कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड के कवि महादेव टोप्पो, प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी, टाटा स्टील के चीफ कॉरपोरेट कम्युनिकेशन सर्वेश कुमार और संयोजक मालविका बनर्जी ने किया.

साहित्य का हो स्थायी मंच

‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि प्रभात खबर आरंभ से ही लिटरेरी मीट से जुड़ा हुआ है. कोविड के कारण मुश्किल दिनों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब हम दोबारा पुराने दिनों की ओर लौट रहे हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पढ़ने की आदत में एक कमी सी आयी है. पर ऐसे साहित्य उत्सव के आयोजन से लोगों में जागरूकता बनी रहती है. उन्होंने कहा कि साहित्य का एक स्थायी मंच होना चाहिए. जहां हमेशा साहित्यकारों का जुटान हो सके. साहित्य एक दर्शन होता है. सृजन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. आजादी के आंदोलन में भी साहित्य की अहम भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में साहित्य की सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी से है. पढ़ने-लिखने का प्रचलन कम हुआ है. हालांकि, इसी टेक्नोलॉजी ने अब साहित्य को बढ़ाया भी है. गूगल दुनिया भर के 1.5 करोड़ साहित्य का डिजिटलीकरण कर रहा है. लोग अब डिजिटल रूप में साहित्य पढ़ना चाहते हैं. श्री चतुर्वेदी ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में नारों के जाल में युवा फंस जाते हैं, लेकिन इससे विचारधारा को नुकसान होता है. वे विचारधारा की गहराई में नहीं जा पाते हैं. उन्होंने अंत में गुलजार की कविता ‘किताबें झांकती हैं…’ सुनायी.

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नयी तकनीक से पढ़ती है आज की पीढ़ी

कवि महादेव टोप्पो ने कहा कि आज की पीढ़ी नयी तकनीक से पढ़ती है. सोशल मीडिया के माध्यम से कई कविताएं और कवि लोगों के बीच प्रसिद्ध हो रहे हैं. नयी तकनीक से पाठक भी बढ़े हैं. आज स्थानीय साहित्य की चर्चा भी देश और दुनिया में हो रही है. आदिवासी साहित्य में जल-जंगल जमीन ही नहीं जीवन का दर्शन होता है.

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जमशेद जी की सोच को आगे बढ़ा रही टाटा स्टील

टाटा स्टील के सर्वेश कुमार ने कहा कि टाटा स्टील सिद्धांतवादी कंपनी है. जमशेद जी की सोच थी कि कला, संस्कृति और खेल को भी बढ़ावा देना है. लिटरेरी मीट की अगली कड़ी भुवनेश्वर व कोलकाता में है. मालविका बनर्जी ने कहा कि दो साल एक माह बाद लिटरेरी मीट का आयोजन हो रहा है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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