Ranchi News : बेसहारा मानसिक रोगियों के लिए सहारा बना सेवा धाम ट्रस्ट

मानवीय सेवा की मिसाल बनते हुए एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, पुंदाग में मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोगों के जीवन में आशा की नयी किरण लेकर आया है.

35 रोगी कर रहे सामान्य जीवन, सात लौटे घर, तीन को अपनों का इंतजार

रांची. मानवीय सेवा की मिसाल बनते हुए एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, पुंदाग में मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोगों के जीवन में आशा की नयी किरण लेकर आया है. यह संस्था संत शिरोमणि परमहंस डॉ श्री सदानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित हो रही है और अब तक कई जिंदगियों को नया स्वरूप दे चुकी है. ट्रस्ट द्वारा संचालित सत्य प्रेम सभागार में वर्तमान में 35 मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग रह रहे हैं, जिन्हें संस्था ””प्रभुजी”” कहकर सम्मान देती है. इनमें से सात लोग पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने परिजनों के पास लौट चुके हैं, जबकि तीन प्रभुजी पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन घर का पता याद न होने के कारण आश्रम में ही रुके हैं.

16 जून 2024 को हुई थी शुरुआत

सेवा कार्य की शुरुआत 16 जून 2024 को राधा-कृष्ण मंदिर की स्थापना के साथ हुई थी. मंदिर के दूसरे तल पर बनाये गये सत्य प्रेम सभागार में फिलहाल 50 बिस्तरों की सुविधा है, जबकि कुल 80 लोगों के लिए रहने की क्षमता विकसित की गयी है. यहां 17 प्रशिक्षित सेवादार प्रभुजी की देखरेख, दिनचर्या, खान-पान और अन्य आवश्यक कार्यों में समर्पित भाव से सेवाएं दे रहे हैं. संस्था के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल के अनुसार, गुरुजी की प्रेरणा से सेवा कार्य की शुरुआत की गयी थी. प्रभुजी की दिनचर्या में योग, ध्यान, सुबह की सैर और मानसिक व्यायाम जैसे गतिविधियां शामिल की जाती हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास धीरे-धीरे लौटता है.

सड़क से आश्रम तक, सेवा की संपूर्ण प्रक्रिया

आश्रम द्वारा सड़कों पर घूमते बेसहारा मानसिक रोगियों को चिह्नित कर उन्हें आश्रम लाया जाता है. यहां उनके स्नान, साफ-सफाई और वस्त्र परिवर्तन के बाद भगवान के नाम पर उनका नामकरण किया जाता है, जैसे-कृष्ण, गोपाल, कान्हा आदि. प्रत्येक प्रभुजी की एक फाइल तैयार की जाती है, जिसमें उनकी जानकारी और उपचार विवरण दर्ज होता है. आश्रम में आने वाले कई लोगों को भोजन करने का तरीका तक नहीं पता होता, लेकिन यहां के अनुशासित माहौल और समर्पित सेवा से वे फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटते हैं. यह आश्रम केवल एक सेवा केंद्र नहीं, बल्कि मानवता की पुनर्स्थापना का केंद्र बन चुका है.

नियमित चिकित्सा और पुनर्वास की व्यवस्था

हर माह दो बार मनोचिकित्सक डॉ एचपी नारायण द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है. अब तक जिन रोगियों को उनके घर का पता याद था, उनके परिजनों से संपर्क कर स्थानीय थाना की मदद से उन्हें सकुशल घर भेजा गया है. ये लोग झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से थे.

तीन लोग कर रहे अपनों का इंतजार

आश्रम में रह रहे साहेब, अशोक और गोपाल नामक प्रभुजी मानसिक रूप से स्वस्थ हो चुके हैं और सामान्य दिनचर्या में पूरी तरह समायोजित हैं, लेकिन उन्हें अपना घर या परिवार याद नहीं है. संस्था उन्हें लेकर प्रशासन और समाज से सहयोग की अपेक्षा कर रही है ताकि वे भी अपने परिजनों से मिल सकें.

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