रांची. राज्य सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी झारखंड ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप योजना को व्यापक रूप देने के लिए इसमें संशोधन किया है. वर्ष 2025-26 में रांची की 30 पंचायतों को 30 कॉलेजों से जोड़कर योजना के पायलट चरण में कुल 120 प्रशिक्षुओं और 30 मेंटर्स ने भाग लिया. इस दौरान 120 इंटर्नशिप प्रतिवेदन प्राप्त हुए और 100 से अधिक पारंपरिक ज्ञान व नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया. पायलट चरण में सामने आयी चुनौतियों और अनुभवों के आधार पर सरकार ने योजना में संशोधन किया है.
हर वर्ष अधिकतम 10 हजार छात्रों का होगा चयन
संशोधन के बाद अब योजना के तहत प्रत्येक वर्ष अधिकतम 10 हजार छात्रों का प्रशिक्षु के रूप में चयन किया जायेगा. प्रशिक्षुओं को चार-चार के समूह में संगठित किया जायेगा, जो पंचायत स्तर पर कार्य करेंगे. पूर्व में प्रत्येक वर्ष 17380 छात्रों का प्रशिक्षु के रूप में चयन किया जाना था. इसे अब बदल दिया गया है.
आठ सप्ताह की होगी इंटर्नशिप
इंटर्नशिप शैक्षणिक कैलेंडर के ग्रीष्मावकाश की आठ सप्ताह की अवधि में आयोजित की जायेगी. इंटर्नशिप शुरू करने और समाप्त करने की तिथि कॉलेजों में सेमेस्टर परीक्षा की समय सारिणी के अनुसार तय होगी. प्रथम सप्ताह प्रशिक्षुओं और मेंटर्स के ओरिएंटेशन व प्रशिक्षण के लिए निर्धारित रहेगा. दूसरे सप्ताह से इंटर्नशिप की समाप्ति तक टीमें पंचायतों का भ्रमण करेंगी और पोर्टल पर इंटर्नशिप रिपोर्ट जमा करेंगी.
पोर्टल पर पंचायतों की सूची होगी उपलब्ध
जेसीएसटीआइ झारखंड के सभी पंचायतों की सूची तैयार कर योजना के वेब पोर्टल पर अपलोड करेगा. इंटर्नशिप टीमों को उच्च स्तरीय समिति द्वारा निर्धारित अवधि के भीतर योजना पोर्टल पर अपनी पसंद के अनुसार पंचायतों का चयन करना होगा.
प्रशिक्षु छोड़ेंगे तो प्रतीक्षा सूची से होगा चयन
किसी प्रशिक्षु के इंटर्नशिप छोड़ने पर प्राचार्य या विभागाध्यक्ष दूसरे प्रशिक्षु को नामित करेंगे. इसके लिए अब प्रतीक्षा सूची तैयार की जायेगी.
स्टाइपेंड और मेंटर का मानदेय बढ़ा
सरकार ने प्रशिक्षुओं के स्टाइपेंड में भी बढ़ोतरी की है. अब पूरी इंटर्नशिप अवधि के लिए प्रशिक्षुओं को 10 हजार रुपये की जगह 12 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलेगा. कॉलेज में मेंटर का चयन प्राचार्य और विश्वविद्यालय पीजी में विभागाध्यक्ष करेंगे. एक मेंटर के अधीन दो समूह होंगे. मेंटर को अब 20 हजार रुपये की जगह 30 हजार रुपये मिलेंगे.
ग्रासरूट को-ऑर्डिनेटर को मिलेंगे 80 हजार रुपये
ग्रासरूट को-ऑर्डिनेटर को 80 हजार रुपये मिलेंगे. इनका चयन पीएचडी के विद्यार्थियों से किया जायेगा. इसके अलावा सेवानिवृत्त या सेवारत वन अधिकारी, राजस्व अधिकारी, वैज्ञानिक, वनस्पति विज्ञानी, सरकारी अधिकारी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर या शिक्षक, पीजी/एमबीए के छात्र या ग्रामीण व सामुदायिक ज्ञान रखनेवाले व्यक्ति का भी चयन किया जा सकता है.
बेहतर कार्य करने वालों को 50 हजार का पुरस्कार
परियोजना प्रतिवेदन का मूल्यांकन दो चरणों में होगा. श्रेष्ठ कार्य करनेवालों को 50 हजार रुपये नकद पुरस्कार दिये जायेंगे. साथ ही उन्हें तीन से पांच दिनों तक आइआइटी, आइआइएम आदि के भ्रमण का मौका मिलेगा.
योजना पर खर्च होंगे 19.33 करोड़ रुपये
सरकार के अनुसार इस योजना पर अनुमानित वार्षिक व्यय 193341000 रुपये होगा, यानी करीब 19 करोड़ 33 लाख रुपये. योजना के संशोधन का उद्देश्य इंटर्नशिप को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ पंचायत स्तर पर पारंपरिक ज्ञान और नवाचारों के दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना है.
