रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट
रांची : झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा धुर्वा स्थित मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, शालीमार में 'प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना' के तहत दो दिवसीय बीमा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में झारखंड के अलग-अलग जिलों से आए मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्यों और मत्स्य विभाग की योजनाओं से जुड़े सैकड़ों लाभुकों ने भाग लिया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार ने कहा कि जलीय कृषि में होने वाले संभावित नुकसान से बचने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बीमा योजना लागू की गई है, जो किसानों के लिए एक सशक्त आर्थिक कवच का काम करेगी.
NFDP पोर्टल पर पंजीकरण और 100% लाभ दिलाने का संकल्प
मत्स्य कृषकों को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के उद्देश्य से अधिकारियों ने अधिक से अधिक किसानों से एनएफडीपी (NFDP) पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराने की अपील की. मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि बीमा पॉलिसी से जुड़ने से मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी और इसके लिए निदेशालय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि राज्य का कोई भी पात्र किसान इस योजना के लाभ से वंचित न रहे. उन्होंने आश्वस्त किया कि मत्स्य कृषकों को इस योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाना विभाग की प्राथमिकता है.
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विशेषज्ञों ने समझाई जलीय कृषि बीमा की बारीकियां
इस दो दिवसीय सत्र के दौरान एनएफडीबी (NFDP) हैदराबाद और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी रांची के विषय विशेषज्ञों ने किसानों को जलीय कृषि बीमा योजना, उसकी पूरी प्रक्रिया और उससे होने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी. कार्यक्रम में उप सचिव राजीव रंजन तिवारी, संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय गुप्ता और उप निदेशक शंभु प्रसाद यादव सहित बीमा कंपनियों की क्षेत्रीय प्रबंधक आशा प्रसाद और उप प्रबंधक मनीषा टोप्पो मौजूद रहे, जिन्होंने किसानों के सवालों और शंकाओं का समाधान भी किया.
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