Sarna Dharma Code, रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की आदिवासी संस्कृति और उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. सीएम ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे आगामी जनगणना के दूसरे चरण में आदिवासी/सरना धर्म के लिए एक अलग ‘धर्म कोड’ आवंटित करने के संबंध में केंद्र सरकार से अनुशंसा करें.
आदिवासी अस्मिता और प्रकृति पूजा का महत्व
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि झारखंड की पहचान यहां की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति और प्रकृति आधारित जीवनशैली से जुड़ी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराएं सदियों से जल-जंगल-जमीन और सामुदायिक मूल्यों पर आधारित हैं, जिसे व्यापक रूप से “सरना धर्म” के रूप में मान्यता प्राप्त है. मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि जनगणना प्रपत्रों में अनुसूचित जनजाति (ST) का कॉलम तो है, लेकिन उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान का उल्लेख नहीं है, जिससे यह समाज प्रशासनिक वर्गीकरण में अपनी पहचान खो रहा है.
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विधानसभा के संकल्प और जनभावना का हवाला
राज्यपाल संतोष गंगवार को भेजे गए पत्र में मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि झारखंड विधानसभा द्वारा पहले ही इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरना धर्म कोड की मांग राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आदिवासी समुदायों द्वारा निरंतर की जा रही है. मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि जनगणना में इस विशिष्ट पहचान को दर्ज नहीं किया जाता है, तो इससे भविष्य की सरकारी नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
राज्यपाल के संवैधानिक उत्तरदायित्वों पर जोर
हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को संविधान की धारा-244 और पांचवीं अनुसूची के तहत प्रदत्त विशेष उत्तरदायित्वों की याद दिलाते हुए कहा कि यह मामला झारखंड जैसे राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे राज्य की जनभावनाओं और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता को ध्यान में रखते हुए माननीय राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष इस विषय पर सकारात्मक पहल करें. मुख्यमंत्री का मानना है कि यह कदम झारखंड में सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.
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