सरना धर्म कोड पर CM हेमंत की बड़ी पहल, आदिवासियों के लिए जनगणना 2027 में अलग कॉलम की मांग

Sarna Dharma Code: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर आगामी जनगणना 2027 में 'सरना धर्म' के लिए अलग कोड आवंटित करने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रकृति आधारित आदिवासी संस्कृति और उनकी विशिष्ट पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाना प्राथमिकता है. उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस विषय पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष सकारात्मक अनुशंसा करें.

Sarna Dharma Code, रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की आदिवासी संस्कृति और उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. सीएम ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे आगामी जनगणना के दूसरे चरण में आदिवासी/सरना धर्म के लिए एक अलग ‘धर्म कोड’ आवंटित करने के संबंध में केंद्र सरकार से अनुशंसा करें.

आदिवासी अस्मिता और प्रकृति पूजा का महत्व

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि झारखंड की पहचान यहां की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति और प्रकृति आधारित जीवनशैली से जुड़ी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासी समाज की धार्मिक परंपराएं सदियों से जल-जंगल-जमीन और सामुदायिक मूल्यों पर आधारित हैं, जिसे व्यापक रूप से “सरना धर्म” के रूप में मान्यता प्राप्त है. मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि जनगणना प्रपत्रों में अनुसूचित जनजाति (ST) का कॉलम तो है, लेकिन उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान का उल्लेख नहीं है, जिससे यह समाज प्रशासनिक वर्गीकरण में अपनी पहचान खो रहा है.

Also Read: चतरा में दर्दनाक हादसा: नवादा गांव में कुएं में गिरने से महिला की मौत, पटवन के दौरान फिसला था पैर

विधानसभा के संकल्प और जनभावना का हवाला

राज्यपाल संतोष गंगवार को भेजे गए पत्र में मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि झारखंड विधानसभा द्वारा पहले ही इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरना धर्म कोड की मांग राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आदिवासी समुदायों द्वारा निरंतर की जा रही है. मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि जनगणना में इस विशिष्ट पहचान को दर्ज नहीं किया जाता है, तो इससे भविष्य की सरकारी नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

राज्यपाल के संवैधानिक उत्तरदायित्वों पर जोर

हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को संविधान की धारा-244 और पांचवीं अनुसूची के तहत प्रदत्त विशेष उत्तरदायित्वों की याद दिलाते हुए कहा कि यह मामला झारखंड जैसे राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे राज्य की जनभावनाओं और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता को ध्यान में रखते हुए माननीय राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष इस विषय पर सकारात्मक पहल करें. मुख्यमंत्री का मानना है कि यह कदम झारखंड में सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

Also Read: पलामू में नीट परीक्षा के दौरान भारी बवाल: 48 परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र नहीं मिलने से मारपीट

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >