रांची से उत्तम महतो की रिपोर्ट
Ranchi Water Supply Project: झारखंड की राजधानी रांची में 1100 करोड़ की जलापूर्ति योजना अधूरी पाइपलाइन के कारण अटक गई है. शहर के अलग-अलग इलाकों में जलापूर्ति नेटवर्क बिछाने और घर-घर वाटर कनेक्शन देने का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन तिलता चौक से पिस्का मोड़ तक करीब 10.42 किमी लंबी राइजिंग पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है. इस कारण इस योजना से जुड़ी करीब पांच लाख आबादी को अब भी नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार है.
जुडको ने शहरी जलापूर्ति योजना के तहत राजधानी के हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए पूरे शहर में 450 किमी से अधिक के क्षेत्रफल में पाइपलाइन का जाल बिछाया है. इस पाइपलाइन से 1.05 लाख से अधिक घरों को वाटर कनेक्शन तक दे दिया गया है. लेकिन दो साल पहले दिए गए इन कनेक्शनों से अब तक किसी भी घर में एक बूंद पानी तक नहीं आया है. इसकी वजह है तिलता से पिस्का मोड़ तक बिछाई जानेवाली पाइपलाइन के लिए एनएचएआइ की ओर से एनओसी नहीं मिलना. इसके लिए जुडको ने एनएचएआइ को वर्ष 2019 से लेकर अब तक आधा दर्जन से अधिक पत्र भेजे हैं. एनओसी को लेकर जुडको व एनएचएआइ के अधिकारी दो बार स्थल का निरीक्षण भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक एनएचएआइ ने एनओसी नहीं दिया है.
10 जलमीनार तैयार, पर पानी नहीं
राइजिंग पाइपलाइन जलापूर्ति व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण पाइपलाइन होती है, इसके माध्यम से डैमों से जलमीनारों तक पानी पहुंचाया जाता है. शहरी जलापूर्ति योजना के तहत शहर में 10 जलमीनारों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. ये जलमीनार पानी के भंडारण और वितरण के लिए लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इनमें पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है. क्योंकि तिलता चौक से पिस्का मोड़ तक पाइपलाइन नहीं बिछाई जा सकी है. इधर, शहर के एक लाख से अधिक घरों को कनेक्शन देने के बाद पानी नहीं आने का असर यह हुआ है कि अब भी इन इलाकों के लोग बोरिंग और चापाकल पर निर्भर है. इस बार की गर्मी में जब वाटर लेबल नीचे गया और बोरवेल फेल होने लगे, तो प्रभावित लोग पूरी तरह से नगर निगम के टैंकरों पर आश्रित हो गए.
सबसे अधिक जलसंकट इन इलाकों में
हर वर्ष गर्मी की दस्तक के साथ ही राजधानी रांची के 200 से अधिक मोहल्लों में जलसंकट गहरा जाता है. फरवरी से शुरू होने वाला बोरिंग सूखने का सिलसिला जून के मध्य तक जारी रहता है. भूजल स्तर लगातार नीचे जाने और आबादी बढ़ने के कारण कई इलाकों में लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ती है. सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में स्वर्णजयंती नगर, विद्यानगर, गंगा नगर, मधुकम, आनंद नगर, इलाही नगर, हिंदपीढ़ी, नाला रोड, यमुना नगर, इंद्रपुरी, बड़गाईं, तिरिल बस्ती, सामलौंग, मौलाना आजाद कॉलोनी, नेजाम नगर, पुरानी रांची, हरमू हाउसिंग कॉलोनी, अलबर्ट कंपाउंड, धुमसा टोली, कृष्णापुरी और रामनगर शामिल हैं. इन इलाकों में गर्मी बढ़ते ही सैकड़ों बोरिंग जवाब दे देती है. कई मोहल्लों में लोगों को सुबह-शाम पानी के लिए कतार लगानी पड़ती है, जबकि कुछ जगहों पर नगर निगम के टैंकर ही एकमात्र सहारा बन जाते हैं. कई परिवारों को निजी टैंकरों से महंगा पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
मेयर ने क्या कहा?
रांची की मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि जुडको ने पूरे शहर को नर्क दिया है. यहां के अफसरों और कर्मियों के पास काम करने का विजन नहीं है. दो साल पहले पाइपलाइन बिछने के बाद भी अब तक किसी के घर में एक बूंद पानी नहीं आया है. आज जुडको के पदाधिकारी एनओसी नहीं मिलने का हवाला दे रहे हैं. लेकिन यह असत्य है. एनएचएआइ ने जुडको को एनओसी दिया था, लेकिन जुडको ने पाइपलाइन नहीं बिछाई. जब एनएचएआइ ने तिलता से पिस्का मोड़ तक रोड बना दिया, तो अब जुडको को रोड तोड़ने के लिए एनओसी चाहिए.
डिप्टी मेयर ने जताई नाराजगी
डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने कहा कि जुडको की यह लेट लतीफी समझ से परे है. हमारा घर वार्ड नंबर 31 में आता है. जुडको ने दो साल पहले ही हमारे वार्ड में पाइपलाइन बिछाई है, लेकिन इसमें कब पानी आएगा यह बताने वाला कोई नहीं है.
पार्षद बोली- सबसे ज्यादा संकट हमारे वार्ड में
वार्ड संख्या-28 की पार्षद रश्मि चौधरी ने कहा कि पूरी रांची में सबसे अधिक जलसंकट हमारे वार्ड में है. वार्ड के मधुकम से लेकर स्वर्णजयंती नगर के लोग गर्मी में पूरी तरह से टैंकर पर आश्रित हो जाते हैं. इसके बाद भी पानी नहीं आना दुर्भाग्यपूर्ण है.
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