Water Crisis: रांची में गहराया जल संकट, धुर्वा में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे 1 लाख लोग

Water Crisis: रांची के धुर्वा समेत कई इलाकों में बिजली कटौती के कारण जल संकट गहरा गया है. हटिया डैम से पानी की सप्लाई बाधित होने से करीब एक लाख लोग प्रभावित हैं. भीषण गर्मी में लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं, जबकि विभाग बिजली बहाली के बाद स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहा है.

रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट

Water Crisis: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रही है. खासकर धुर्वा और आसपास के इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे करीब एक लाख की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है. भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

हटिया डैम से सप्लाई बाधित

शहर के कई प्रमुख इलाकों (धुर्वा, हटिया, डोरंडा, हिनू, बिरसा चौक और एयरपोर्ट क्षेत्र) में हटिया डैम से होने वाली जलापूर्ति बाधित हो गई है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पिछले 72 घंटों से नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. इससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. जलापूर्ति बाधित होने का असर घरों के साथ-साथ छोटे व्यवसायों और दुकानों पर भी देखने को मिल रहा है.

बिजली कटौती बनी मुख्य वजह

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह लगातार हो रही बिजली कटौती है. हटिया डैम स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. बिजली की कमी के कारण पानी को लिफ्ट करने और पाइपलाइन में पर्याप्त दबाव (प्रेशर) बनाने में समस्या आ रही है. इसी वजह से जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही है.

आंशिक सप्लाई से बढ़ी परेशानी

पिछले तीन दिनों से इन इलाकों में केवल आंशिक जलापूर्ति ही हो रही है. कई जगहों पर नलों में पानी आता भी है, तो उसका प्रेशर बेहद कम होता है. इससे लोगों को पानी भरने में काफी दिक्कत हो रही है. धुर्वा सेक्टर-2 के निवासी राजीव सिन्हा बताते हैं कि नल से पानी या तो आता नहीं है, और अगर आता है तो इतना कम कि बर्तन भरना भी मुश्किल हो जाता है.

बाजार से पानी खरीदने को मजबूर लोग

जल संकट के चलते लोग अब बाजार से जार और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हो गए हैं. इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में पानी की मांग पहले से ज्यादा होती है, लेकिन सप्लाई अनियमित होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है. कई परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी का इंतजाम करना चुनौती बन गया है.

विभाग ने जताई परेशानी

पेयजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब तक पावर कट की समस्या दूर नहीं होती, तब तक जलापूर्ति को पूरी तरह बहाल करना मुश्किल रहेगा. अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बिजली आपूर्ति सामान्य होगी, जलापूर्ति भी धीरे-धीरे सुचारू हो जाएगी.

लोगों में बढ़ती नाराजगी

लगातार हो रही पानी की किल्लत से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में ऐसी समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जलापूर्ति और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सके.

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जल्द समाधान की उम्मीद

फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं. लेकिन जब तक बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक जल संकट से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. रांची के हजारों लोगों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, और सभी को जल्द से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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