रांची. राजधानी की प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए डिवाइडर के कट कम करने की तैयारी शुरू हो गयी है. हालांकि, बेतरतीब तरीके से बने इन कटों को बंद करना आसान नहीं होगा. राजभवन से बूटी मोड़ तक करीब 64 और कोकर से जुमार पुल तक 56 छोटे-बड़े कट हैं. कई जगहों पर महज 10 मीटर की दूरी पर ही दो कट बने हुए हैं.
कई कट मोहल्लों और अस्पतालों तक पहुंचने के लिए जरूरी
इन कटों से वाहन और पैदल यात्री अचानक मुख्य सड़क पर पहुंच जाते हैं. इससे जाम के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ता है. दूसरी ओर, कई कट आसपास की कॉलोनियों, मोहल्लों और अस्पतालों तक पहुंचने के लिए जरूरी हैं. ऐसे में सभी कट बंद करने के बजाय अनावश्यक और खतरनाक कटों की पहचान कर उन्हें बंद करना ही व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है.
छोटे कटों से ज्यादा दुर्घटना का खतरा
रिम्स-बरियातू रोड पर सबसे बड़ी समस्या छोटे-छोटे कटों की है. इनसे बाइक सवार और पैदल यात्री अचानक मुख्य सड़क पर आ जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है.
रिम्स के आसपास मुख्य सड़क पर करीब छह कट हैं. इनमें तीन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती रहती है, लेकिन बाकी स्थानों पर लोग अपनी सुविधा के अनुसार सड़क पार करते हैं. इससे वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और कई बार जाम की स्थिति बनती है.
राजभवन से रिम्स तक करीब 18 कट
राजभवन से रिम्स तक करीब 18 कट हैं. रानी हॉस्पिटल के पास बना कट अस्पताल और आसपास के अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है. इसे बंद करने पर लोगों को रेडियम रोड स्थित चौक से घूमकर जाना पड़ेगा.
रेडियम रोड और करमटोली के बीच तीन कट हैं. इनमें एक कट मोरहाबादी, डीएसपीएमयू, रांची विश्वविद्यालय और कांके की ओर जाने वाले लोगों के लिए उपयोगी है. प्रेस क्लब से पहले भी एक कट है.
करमटोली से रिम्स के बीच करीब 11 कट हैं. वसुंधरा पाम आइलैंड समेत आसपास के अपार्टमेंट और घरों के कारण इस हिस्से में कई जगह सड़क पार करने की जरूरत पड़ती है.
कोकर से जुमार पुल तक 56 कट
कोकर से बूटी मोड़ होते हुए जुमार पुल तक करीब सात किलोमीटर लंबी सड़क पर 56 कट हैं. डिवाइडर के बीच लगातार बने इन कटों के कारण मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है.
कोकर इंडस्ट्रियल एरिया से निकलते ही डॉन बॉस्को गली के पास एक कट है. इसके कुछ कदम आगे दूसरा कट मिलता है. शराब दुकान और बड्डा पेट्रोल पंप के पास भी कई कट बने हुए हैं.
आगे सैमफोर्ड अस्पताल, पेट्रोल पंप और मदन ढाबा के आसपास दो-दो कट हैं. बांधगाड़ी-दीपाटोली के पास एक ही लाइन में चार कट बने हुए हैं. इससे कई स्थानों पर वाहन अचानक मुख्य सड़क पर प्रवेश करते और बाहर निकलते हैं.
गाड़ीखाना से सहजानंद चौक तक चार कट
हरमू रोड पर कई अनधिकृत कट पहले ही बंद किये जा चुके हैं. गाड़ीखाना चौक से सहजानंद चौक के बीच अब प्रमुख रूप से चार कट हैं. इनमें गाड़ीखाना चौक, किशोरगंज चौक, भारत माता चौक और हरमू पुल शामिल हैं.
इन कटों का इस्तेमाल अलग-अलग इलाकों में आने-जाने के लिए होता है. गाड़ीखाना चौक अपर बाजार को जोड़ता है, जबकि किशोरगंज का कट बड़ा तालाब, डा. तालाब, सेवा सदन और आसपास के इलाकों के लिए उपयोगी है. भारत माता चौक से मुक्ति धाम और हरमू रोड की ओर आवाजाही होती है.
कट बंद होने से इन इलाकों पर पड़ेगा असर
अनावश्यक कट बंद होने से मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही सुगम हो सकती है. अचानक वाहनों के प्रवेश और निकास पर रोक लगेगी. इससे जाम और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है.
हालांकि, कट बंद करने का असर आसपास की बस्तियों और कॉलोनियों पर भी पड़ेगा. डॉन बॉस्को गली, डेलाटोली, बांधगाड़ी-दीपाटोली, हनुमान नगर, मेडिका गली, बूटी बस्ती, शिवाजी नगर, त्रिवेणीपुरम और सैनिक कॉलोनी के लोगों को वैकल्पिक रास्ते से लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है.
अस्पतालों के कारण कई कट जरूरी
बरियातू स्थित पल्स हॉस्पिटल के सामने दो कट हैं. इनमें एक डीआइजी ग्राउंड और दूसरा हरिहर सिंह रोड की ओर जाता है. हरिहर सिंह रोड वाला कट बड़ी संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं.
रिम्स से पहले भी दो-तीन कट हैं, जहां पैथोलैब, अपार्टमेंट और घर स्थित हैं. रिम्स के पास अस्पताल जाने के लिए दो प्रमुख कट हैं. रिम्स और बरियातू रोड पर कई अस्पताल होने के कारण दिनभर वाहनों और एंबुलेंस की आवाजाही रहती है. ऐसे में इस हिस्से के सभी कट बंद करना व्यावहारिक नहीं होगा.
उपयोगी और खतरनाक कटों की होगी पहचान
हरमू रोड पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में कई कट बंद किये गये थे. अब राजभवन-बूटी मोड़ और कोकर-जुमार पुल मार्ग पर भी कटों की उपयोगिता की समीक्षा की जा रही है. अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और बड़ी आबादी वाले इलाकों की आवाजाही प्रभावित न हो. ऐसे में सभी कट बंद करने के बजाय जरूरी, उपयोगी और खतरनाक कटों को अलग-अलग चिह्नित कर चरणबद्ध कार्रवाई करना बेहतर विकल्प हो सकता है.
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कटों के मुआयने के लिए बनी संयुक्त टीम
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राजधानी की सड़कों पर बने कटों का मुआयना करने के लिए संयुक्त टीम बनायी गयी है. रांची के डीसी ने इस टीम का गठन किया है. इसमें ट्रैफिक पुलिस, रांची नगर निगम और आरसीडी के पदाधिकारियों को शामिल किया गया है.
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रोड सेफ्टी के लिए सुविधाओं की जरूरत
टीम सभी कटों का मुआयना करेगी और यह देखेगी कि कौन सा कट जरूरी है और किस स्थान पर रोड सेफ्टी के लिहाज से लाइटिंग समेत अन्य सुविधाओं की जरूरत है. साथ ही ऐसे कटों की भी पहचान की जाएगी, जिन्हें बंद करना जरूरी है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके.
