Ranchi News: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरन को लिखे गए एक पत्र से सरकार और प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है. बाबू लाल मरांडी ने पत्र में कथित तौर पर आरोप लगाया है कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार) के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने जेल में बंद एक महिला कैदी (23) का यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई. बाबू लाल मरांडी ने यह भी आरोप लगाया है कि इस जघन्य अपराध पर कारा महानिरीक्षक (आइजी जेल) मामले को रफा-दफा करने, फाइलों को गायब कराने और कारा अधीक्षक को बचाने की साजिश रच रहे है. महिला कैदी को रांची पुलिस ने पांच नवंबर 2025 को एनडीपीएस एक्ट में न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेजा था. इस पूरे घटना का दिलचस्प पहलू है कि सबसे पहले प्रेगनेंसी किट से हुई जांच में महिला कैदी के गर्भवती होने को पुष्टि हुई थी. इथर, 16 मई की रात जेल के डॉक्टरों की टीम ने महिला कैदी का ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए जेल में इम्पैनल ब्लड बैंक बायोकेम लैब को भेजा. लैब ने जांच कर रविवार को रिपोर्ट बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा को उपलब्ध कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई है. इसकी पुष्टि करते हुए जेल के चिकित्सक डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट के हिसाब से महिला गर्भवती नहीं है. इसके बावजूद सदर अस्पताल और रिम्स के गायनेकोलॉजी विभाग को पत्र लिखकर महिला कैदी की जांच करने का आग्रह किया गया है, जिससे आरोप सत्यता की जांच की जा सके.
क्या लिखा है बाबूलाल मरांडी के पत्र में?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में आरोप लगाया गया है कि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के काराधीक्षक ने एक महिला कैदी का लगातार मानसिक और शरारिक शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई. मामले की गंभीरता के बावजूद जेल आइजी और राज्य के उच्च अधिकारी इसे दबाने का प्रयास कर रहे हैं. मामले की फाइलें गायब की जा रही हैं, साक्ष्य नष्ट कराने के लिए पीड़िता को गुप्त रूप से अस्पतालों और अन्य स्थानी पर ले जाया जा रहा है, गवाहों को स्थानांतरित किया जा रहा है. यह एक संगठित दीर्घकालिक आपराधिक तंत्र है, जिसे रिश्वत और प्रशासनिक संरक्षण से संचालित किया जा रहा है. उन्होंने सीएम से तत्काल कड़ी कार्रवाई कर दोषियों को बर्खास्त और कानूनी कार्रवाई के अंतर्गत जेल भेजने की मांग की है.
अप्रैल में ही प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी
जेल के चिकिस्तक डॉ मुकेश कुमार के अनुसार, महिला कैदी ने अप्रैल में जेल के अस्पताल में उबकाई और समय पर पीरियड नहीं आने की शिकायत की थी. डॉक्टर अपराजिता ने जांच की थी. प्रेगनेंसी किट से महिला की यूरिन जांच कराई गई, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई. 14 अप्रैल की पेट दर्द की शिकायत पर उसे सदर अस्पताल ले जाया गया. दूसरी बार 28 अप्रैल को वहां अल्ट्रासाउंड कराया गया, जांच रिपोर्ट में महिला को अनियमित मासिक धर्म और बच्चेदानी में सिस्ट की पुष्टि हुई है.
अलग कमरे और पैसों के लिए ब्लैकमेल कर रही महिला
बिरसा मुंद्रा केंद्रीय कारा के चिकित्सक डॉ मुकेश कुमार के अनुसार, महिला बंदी जेल अधिकारियों को अलग कमरा, मोबाइल और पैसों के लिए ब्लैकमेल कर रही थी. 16 मई की रात भी जब उसका ब्लड सैंपल लिया जा रहा था तो वह बार-बार कह रही थी कि आपलोग मेरी डिमांड याद रखना. पहले डिमांड पूरी करोगे, तभी जांच के लिए बलड सैंपल दूंगी. काफी समझाने पर उसने अपना ब्लड सैंपल दिया.
डीसी और जेल आइजी को दी गई मामले की जानकारी
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा प्रशासन ने रविवार को मामले की जानकारी रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भगंत्री और जेल आइजी सुदर्शन मंडल को दी है. इस संबंध में उपायुक्त ने बताया कि महिला कैदी की प्रेगनेंसी जांच रिपोर्ट निगेटिव आने की जानकारी जेल प्रशासन की और से रविवार को दी गई है, वे अपने स्तर से मामले की जांच एसडीओ या एडीएम लॉ एंड ऑर्डर से करवाएंगे, जरूरत पड़ी तो चिकित्सकीय टीम का भी सहयोग लिया जाएगा. वहीं, प्रभात खबर ने इस मामले में जेल आइजी का पक्ष लेने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं सका.
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