रांची में अनोखा रक्षाबंधन: 9 साल की कायरा ने बेजुबान जानवरों को बांधी राखी, दिया इंसानियत का संदेश

रांची की 9 वर्षीय कायरा मिश्रा ने रक्षाबंधन को एक नया अर्थ दिया है, बेजुबान जानवरों को राखी बांधकर. जानें कैसे वह पशुओं के प्रति करुणा और सुरक्षा का संदेश दे रही हैं.


Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के पर्व के रूप में देखा जाता है, लेकिन रांची की नौ वर्षीय कायरा मिश्रा ने इस त्योहार को बेजुबान जानवरों की सुरक्षा और संवेदना से जोड़कर एक अलग मिसाल पेश की है. सेंट माइकल्स स्कूल, रांची की कक्षा पांच की छात्रा कायरा पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर कुत्तों और बिल्लियों को राखी बांधकर लोगों को पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा का संदेश देती आ रही हैं. कायरा का मानना है कि कम्युनिटी एनिमल्स भी हमारे समाज का हिस्सा हैं. इसलिए उन्हें केवल दया नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान भी मिलना चाहिए.

रेस्क्यू किए गए जानवरों से भरा है कायरा का घर


कायरा के परिवार में बेजुबान जानवरों के लिए खास जगह है. उनके घर में करीब 12 से 15 ऐसे जानवर रहते हैं, जिन्हें अलग-अलग परिस्थितियों से बचाकर उनके माता-पिता घर लेकर आए हैं. इनमें ज्यादातर कुत्ते और बिल्लियां हैं. कुछ पक्षी भी कभी इस परिवार का हिस्सा रहे, जिनकी यादें आज भी परिवार के साथ जुड़ी हुई हैं. परिवार के अनुसार, किसी जानवर की कमर टूटी हुई थी, किसी की जान खतरे में थी, तो किसी को विशेष देखभाल की जरूरत थी. इलाज और प्यार मिलने के बाद अब ये सभी परिवार का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं.

सिर्फ राखी नहीं, रोज निभाती हैं जिम्मेदारी


कायरा का रिश्ता इन जानवरों से केवल रक्षाबंधन तक सीमित नहीं है. वह रोज उन्हें खाना खिलाती हैं, उनकी देखभाल करती हैं और जरूरत पड़ने पर दवा देने में भी परिवार की मदद करती हैं.उनके लिए ये जानवर पालतू भर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं, जिनके साथ अपनापन और जिम्मेदारी दोनों जुड़े हैं.

समाज को दिया करुणा का संदेश


कायरा कहती हैं कि बेजुबान जानवर भी दर्द महसूस करते हैं और उन्हें भी प्यार की जरूरत होती है. इसलिए उनके साथ क्रूरता नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए. उनकी यह पहल लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिन जानवरों के साथ हम रोज रहते हैं, उनकी सुरक्षा और सम्मान भी हमारी जिम्मेदारी है.

मुख्यमंत्री से सख्त कानून बनाने की अपील


इस रक्षाबंधन पर कायरा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विशेष अपील भी की है. उन्होंने कहा कि बेजुबान जानवरों की सुरक्षा के लिए ऐसा प्रभावी और सख्त कानून बनाया जाए, जिससे उनके साथ क्रूरता करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके. उनका मानना है कि यदि कानून मजबूत होगा, तो लोग किसी भी जानवर को नुकसान पहुंचाने से पहले कई बार सोचेंगे.

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राखी के धागे में छिपा बड़ा संदेश


कायरा की मां पूजा खुशी मिश्रा ने बताया कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि इंसानियत, करुणा और जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है. उनकी छोटी-सी पहल यह बताती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच जरूरी होती है. रांची की यह अनोखी पहल रक्षाबंधन के पर्व को एक नया अर्थ देती है. संदेश साफ है कि जानवरों से प्यार करें, उनकी रक्षा करें और उनके प्रति क्रूरता से इनकार करें.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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