Pitru Paksha 2022: पितृ पक्ष 11 सितंबर से शुरू, नदी व तालाबों के किनारे लोग पितरों का करेंगे तर्पण

Pitru Paksha 2022: श्राद्ध का अर्थ पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भाव से है. जो मनुष्य अपने पितरों के प्रति उनकी तिथि पर अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, अन्न, मिष्ठान्न आदि से ब्राह्मण को भोजन कराते हैं, उस पर प्रसन्न होकर पितृ उसे आशीर्वाद देकर जाते हैं.

Pitru Paksha 2022: पितृ पक्ष रविवार 11 सितंबर 2022 से शुरू (pitru paksha kab se hai) हो रहा है. इस दिन तर्पण करने के लिए लोग नदी, तालाबों व जलाशयों के किनारे स्नान, ध्यान कर तर्पण करेंगे. रविवार को दिन के 2:15 बजे तक प्रतिपदा तिथि है. पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि जब भगवान सूर्य कन्या राशि में विचरण करते हैं, तब पितृलोक पृथ्वी लोक के सबसे अधिक नजदीक आता है.

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भाव है श्राद्ध

उन्होंने कहा कि श्राद्ध का अर्थ पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भाव से है. जो मनुष्य अपने पितरों के प्रति उनकी तिथि पर अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, अन्न, मिष्ठान्न आदि से ब्राह्मण को भोजन कराते हैं, उस पर प्रसन्न होकर पितृ उसे आशीर्वाद देकर जाते हैं. जिस मास और तिथि को व्यक्ति की मृत्यु हुई है, उस दिन श्राद्ध किया जाता है.

Also Read: Pitru Paksha 2022 LIVE Updates: पितृ पक्ष शुरू, ऐसे करें पिंड दान, जानें पितरों के तर्पण का तरीका, उपाय
16 दिन तक लोग पितरों को देते हैं जल

पंडित कौशल कुमार कहते हैं कि धर्म ग्रंथों के अनुसार 16 दिन तक लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते हैं. ऐसी मान्यता है कि पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है. वर्ष के किसी भी मास व तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है. पूर्णिमा पर देहांत होने से भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को श्राद्ध करने का विधान है.

पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं पितर

इसी दिन से महालय (श्राद्ध) का प्रारंभ भी माना जाता है. पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण वर्ष भर प्रसन्न रहते हैं. श्राद्ध में पितरों को आशा रहती है कि हमारे पुत्र-पौत्रादि हमें पिंडदान व तिलांजलि प्रदान कर संतुष्ट करेंगे. इसी आशा से वे पितृलोक से पृथ्वीलोक पर आते हैं. हिंदू धर्म में मरणोपरांत संस्कारों को पूरा करने के लिए पुत्र का प्रमुख स्थान माना गया है.

श्राद्ध में कुश और तिल का महत्व

उन्होंने कहा कि कुश को जल और वनस्पतियों का सार माना जाता है. यह भी मान्यता है कि कुश और तिल दोनों विष्णु के शरीर से निकले हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, तीनों देवता ब्रह्मा-विष्णु-महेश कुश में क्रमश: जड़, मध्य और अग्रभाग में रहते हैं. कुश का अग्रभाग देवताओं का, मध्य भाग मनुष्यों का और जड़ पितरों का माना जाता है. तिल पितरों को प्रिय है और दुष्टात्माओं को दूर भगाने वाला माना जाता हैं.

25 सितंबर को होगा पितृपक्ष का समापन

25 सितंबर को अमावस्या के दिन इसका समापन होगा. इस दिन रात 3:23 बजे तक अमावस्या होने के कारण तर्पण करने वाले श्रद्धालु को काफी वक्त मिलेगा. इसके लिए मध्याह्नकाल का समय उपयुक्त माना गया है. इस दिन जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, वे इस दिन श्राद्ध कर सकते हैं.

तर्पण के जरूरी सामाग्री

कुश, जल, कुश की अंगूठी, अक्षत, तिल, सफेद चंदन, सफेद फूल, जौ, कुश की आसनी, द्रव्य, सफेद सूता सहित अन्य सामग्री.

श्राद्ध की तिथि

  • 11 रविवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध

  • 12 सोमवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध

  • 13 मंगलवार तृतीया तिथि का श्राद्ध

  • 14 बुधवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध

  • 15 गुरुवार पंचमी तिथि का श्राद्ध

  • 16 शुक्रवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध

  • 17 शनिवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध

  • 18 रविवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध

  • 19 सोमवार नवमी तिथि का श्राद्ध

  • 20 मंगलवार दशमी तिथि का श्राद्ध

  • 21 बुधवार एकादशी तिथि का श्राद्ध

  • 22 गुरुवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध

  • 23 शुक्रवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध

  • 24 शनिवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध – अकाल मृत्यु (शस्त्र अथवा दुर्घटना में मरे पितरों का) श्राद्ध

  • 25 रविवार अमावस्या तिथि का श्राद्ध / सर्वपितृ श्राद्ध

रिपोर्ट- राजकुमार

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >