रांची. आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद ने मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में पेसा कानून 1996 को लेकर एक पुस्तिका जारी की. यह पुस्तिका पेसा कानून 1996, जेपीआरए 2001 और झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तावित पेसा नियमावली 2024 पर चल रहे राज्यव्यापी विमर्श, विवाद और प्रतिरोध को सरल तरीके से आम लोगों को समझाने के लिए जारी की गयी है. अध्यक्ष ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि इस पुस्तिका में पेसा कानून के 23 प्रावधानों, जेपीआरए 2001 में नदारद पेसा कानून के प्रावधान आदि को समझाया गया है. साथ ही पुस्तिका में हमारी परंपरा-हमारी विरासत योजना की आलोचना, पेसा को लेकर सरना-ईसाई विवाद और पेसा कानून को लेकर गैर-आदिवासियों व एनजीओ समूह के विरोध पर विचार रखे गये हैं. इस पुस्तिका को ग्लैडसन डुंगडुंग, लक्ष्मी नारायण मुंडा, सुषमा बिरूली, वाल्टर कंडुलना, मेरी क्लाडिया सोरेंग, जाॅय टुडू, बिनसाय मुंडा, राधाकृष्ण सिंह मुंडा एवं प्रवीण एक्का ने संयुक्त रूप से तैयार किया है. ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि यह पुस्तिका राज्य में चल रहे ‘पेसा उलगुलान’ के लिए मील का पत्थर साबित होगी. अपने निजी आर्थिक और राजनीतिक हितों को साधने वाले तत्वों ने राज्यभर में पेसा कानून 1996, जेपीआरए 2001 और प्रस्तावित पेसा नियमावली 2024 को लेकर भ्रम फैलाया है. आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि नियमावली बनाने के खेल में एनजीओ समूह हैं. हमलोग पेसा कानून 1996 को लागू करवाने हेतु अभियान चला रहे हैं, तो यही एनजीओ समूह जेपीआरए 2001 को लागू कराने में लगा है.
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