नक्सली नेता प्रमोद मिश्रा समेत दो नक्सली गिरफ्तार, मिसिर बेसरा से चल रहा था विवाद

झारखंड-बिहार की सीमा से नक्सली नेता प्रमोद मिश्रा को उसके एक सहयोगी के साथ गिरफ्तार किया गया है. उसे किस जगह से गिरफ्तार किया गया है, इसका खुलासा नहीं हो पाया है. वर्ष 2008 में उसे धनबाद से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में कोर्ट ने 2017 में बरी कर दिया था.

नक्सली नेता प्रमोद मिश्रा को उसके एक सहयोगी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है. भाकपा माओवादी का पोलित ब्यूरो सदस्य पिछले दिनों झारखंड के सारंडा जंगल से फरार हो गया था. बताया जा रहा है कि नक्सलियों के शीर्ष नेताओं में शुमार प्रमोद मिश्रा को झारखंड और बिहार के सीमावर्ती इलाके से गिरफ्तार किया गया है. उसके खिलाफ झारखंड और बिहार में कई मामले दर्ज हैं. झारखंड में उस पर एक करोड़ रुपये के इनाम का प्रस्ताव था. उसकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पायी है.

कई नामों से जाना जाता है प्रमोद मिश्रा

प्रमोद मिश्रा को कई नामों से जाना जाता है. पार्टी के अंदर उसे शुक्ला जी, सोहन दा, कन्हैया, नूर बाबा, बीबीजी, जगन भरत जी, अग्नि और बान बिहारी के नाम से जाना जाता था. झारखंड और बिहार के अलावा छत्तीसगढ़ में हत्या, आगजनी, लूटपाट के दर्जनों केस में वह वांछित था. प्रमोद मिश्रा नक्सली समूह माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया का प्रमुख नेता हुआ करता था. वर्ष 2004 में भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, तो उसे पार्टी की केंद्रीय समिति का सदस्य बना दिया गया.

वर्ष 2007 में पार्टी की 9वीं कांग्रेस में प्रमोद मिश्रा को पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया गया. इतना ही नहीं, दिल्ली संचालन का प्रभारी भी बना दिया गया. उसने हरियाणा, पंजाब और जम्मू कश्मीर सहित अन्य राज्यों में आंदोलन फैलाने में काफी मदद की थी. प्रमोद मिश्रा का नाम यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट की कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म 2006 में आया था.

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2008 में गिरफ्तार हुआ प्रमोद मिश्रा, 2017 में हो गया बरी

इस नक्सली नेता को 11 मई 2008 को धनबाद जिले के विनोद नगर से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वर्ष 2017 में सबूतों के अभाव में कोर्ट ने उसे बरी कर दिया. उसे बिहार समेत देश के कई राज्यों में नक्सली वारदातों में प्रमोद मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था. उसके खिलाफ दो दर्जन के करीब मामले दर्ज थे. झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्रप्रदेश में भी उसके खिलाफ केस दर्ज हुए थे.

सारंडा में कई नक्सली हमलों का है आरोपी

बिहार के रफीगंज के दरमिया नरसंहार केस में भी प्रमोद मिश्रा का नाम आया था. झारखंड के सारंडा इलाके में कई नक्सली हमले का भी आरोपी है. बता दें कि प्रमोद मिश्रा बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज थाना क्षेत्र के कासमा गांव का रहने वाला है. कुछ महीने पहले तक वह पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा में मौजूद था.

ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के प्रमुख की दौड़ में था प्रमोद मिश्रा

बताया जा रहा है कि प्रमोद मिश्रा भाकपा माओवादी ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के सुप्रीमो की दौड़ में था. माओवादियों के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो में झारखंड समेत चार राज्य और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं. चार राज्यों में झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो का मुख्यालय झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला स्थित सारंडा है.

छकरबंधा में माओवादियों को मजबूत कर रहा था प्रमोद

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि वर्ष 2022 के जून महीने में झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित छकरबंधा को सुरक्षा बलों ने नक्सलियों से मुक्त करवाया था. इसके बाद कहा गया कि मिसिर बेसरा वहां से भागकर सारंडा आ गया. इसके पहले वह छकरबंधा में नक्सलियों को मजबूत कर रहा था. लेकिन, हाल के दिनों में उसके सारंडा से भाग जाने की खबर आयी. बता दें कि माओवादियों के एक और पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और प्रमोद मिश्रा के बीच ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो कमांडर के पद को लेकर विवाद था.

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By Mithilesh Jha

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