JSLPS, रांची (मनोज सिंह की रिपोर्ट): झारखंड में नवाचार और महिला उद्यमिता को एक नई वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल की है. अब राज्य के सखी मंडल से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में सफलता की बारीकियां दुनिया के अग्रणी शिक्षण संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) कोलकाता की मदद से सीखेंगी. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी मानी जाने वाली महिला उद्यमियों को व्यावसायिक रूप से दक्ष और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से जेएसएलपीएस ने आईआईएम कोलकाता के साथ एक विशेष समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह रणनीतिक साझेदारी आगामी तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी.
सभी 264 प्रखंडों तक पहुँचेगी प्रशिक्षण की लहर
इस महत्वपूर्ण एमओयू के तहत आईआईएम कोलकाता एक ‘इनक्यूबेटर’ की भूमिका निभाएगा, जो महिला उद्यमियों को उनके शुरुआती सफर से लेकर सफलता के शिखर तक मार्गदर्शन प्रदान करेगा. इस पहल के माध्यम से राज्य के सभी 24 जिलों के अंतर्गत आने वाले 264 प्रखंडों की सखी मंडल की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा. उन्हें वर्तमान बाजार की बदलती मांगों के अनुरूप अपने उद्यम को विकसित करने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस कठिन दौर में मजबूती से टिके रहने और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों को धरातल पर उतारने का अनूठा अवसर प्राप्त होगा.
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पहले चरण में 50 हजार महिलाओं का होगा चयन
योजना के क्रियान्वयन के पहले चरण में राज्य भर से लगभग 50 हजार ग्रामीण महिला उद्यमियों की पहचान की जाएगी. इन चिन्हित महिलाओं में से सबसे योग्य 500 महिलाओं को एक विशेष ‘समग्र उद्यम और व्यापार प्रबंधन’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चुना जाएगा. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल प्रदान करना है, ताकि वे अपने छोटे से व्यवसाय को करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाले बड़े उद्यम में बदल सकें.
150 महिला उद्यमियों को ‘रोल मॉडल’ बनाने का लक्ष्य
इस योजना का एक सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य 150 ऐसी महिला उद्यमियों को तैयार करना है, जो सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर सकें. इन महिलाओं को ‘इनक्यूबेशन तकनीक’ के माध्यम से रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जो समाज की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेंगी. इसके साथ ही, जेएसएलपीएस के पदाधिकारियों और नॉन-फार्म सामुदायिक कैडर (सीआरपी) को भी इनक्यूबेटर स्किल में दक्ष बनाया जाएगा ताकि वे भविष्य में खुद मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकें.
हर प्रमंडल में विकसित होंगे स्थानीय इनक्यूबेशन सेंटर
इस एमओयू की एक विशेष शर्त यह भी है कि तीन साल की योजना अवधि पूरी होने के बाद भी महिला उद्यमियों को सहायता मिलती रहे. इसके लिए आईआईएम कोलकाता राज्य के प्रत्येक प्रमंडल में एक स्थानीय इनक्यूबेटर सेंटर विकसित करेगा. यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क होगी, जिससे ग्रामीण महिलाएं लंबे समय तक अपने उद्यम को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें. इस पूरी परियोजना के लिए इक्विटी फंड और सॉफ्ट लोन के रूप में कुल 5 करोड़ रुपये का विशेष फंड भी सुनिश्चित किया गया है. इस ऐतिहासिक समझौते पर जेएसएलपीएस के सीओओ विष्णु परिदा और आईआईएम कोलकाता के सीईओ डॉ. विवेक कुमार राय ने हस्ताक्षर किए, जहां कई वरीय पदाधिकारी भी साक्षी बने.
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