झारखंड में 'बांस' से बदलेगी लाखों महिलाओं की किस्मत: JSLPS और इंडस्ट्री फाउंडेशन के बीच ऐतिहासिक समझौता

JSLPS: रांची में जेएसएलपीएस और इंडस्ट्री फाउंडेशन ने एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अगले 4 वर्षों में 1 लाख महिला किसानों को बांस की वैल्यू चेन से जोड़ा जाएगा. इस मानसून में राज्य के 5 आदिवासी जिलों से इसकी शुरुआत होगी, जिसका उद्देश्य महिलाओं की आय बढ़ाना और जलवायु अनुकूल आजीविका मॉडल विकसित करना है.

JSLPS, रांची : झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने की दिशा में इंडस्ट्री फाउंडेशन और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ने एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल ‘रीजेनरेटिव’ आजीविका को बढ़ावा देना और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को स्थापित करना है.

1 लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अगले चार वर्षों में 1 लाख महिला लघु किसानों को बांस की खेती और उसकी वैल्यू चेन से जोड़ा जाएगा. इस पहल का पहला चरण इसी मानसून से शुरू हो रहा है, जिसमें राज्य के 5 आदिवासी जिलों की 10,000 महिलाएं शामिल होंगी.

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बांस: दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा का आधार

इंडस्ट्री फाउंडेशन के सीईओ नेजु जॉर्ज अब्राहम के अनुसार, बांस प्रकृति का सबसे तेजी से पुनर्जीवित होने वाला संसाधन है. उन्होंने कहा कि बांस जब महिला किसानों के हाथों में होता है, तो यह दशकों तक चलने वाली स्थायी आजीविका बन जाता है. चौथे वर्ष से आय शुरू होने के बाद यह 40 वर्षों तक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है.”

सरकारी मिशन और वैश्विक मानक

यह पहल भारत सरकार के ‘डे-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (NRLM) के बांस उप-क्षेत्र कार्यक्रम का हिस्सा है. इंडस्ट्री फाउंडेशन ने निजी बांस बागानों के लिए भारत का पहला FSC वन प्रबंधन प्रमाणन हासिल किया है, जो वैश्विक बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करता है. यह सहयोग केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सामूहिक उद्यम बनाने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का काम करेगा. इस अवसर पर JSLPS के सीओओ बिश्नु सी. परिडा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. यह साझेदारी झारखंड को भारत की ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (Green Economy) के केंद्र में लाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी.

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Published by: Sameer Oraon

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