JPSC Student Protest: छात्रों से मैराथन बैठक बेनतीजा, सरकार ने आंदोलन वापस लेने की अपील की

रांची से रिपोर्ट: JPSC छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच तीन दिनों तक चली बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई. सरकार ने छात्रों से आंदोलन वापस लेने और विधानसभा घेराव रद्द करने की अपील की है.


रांची से राजलक्ष्मी की रिपोर्ट

JPSC Student Protest: आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दिनों तक चली मैराथन बैठक के बाद भी सहमति नहीं बन सकी. बैठक बेनतीजा रहने के बाद सरकार की ओर से डेलिगेशन में शामिल मंत्रियों ने सूचना भवन में प्रेस वार्ता की. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को रद्द करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों को समझाने और उनकी मांगों पर समाधान निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन छात्र प्रतिनिधि अब भी संतुष्ट नहीं हैं.

तीन बिंदुओं में जांच की प्रक्रिया

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले को तीन प्रमुख बिंदुओं में बांटकर समाधान निकालने का प्रयास किया. 14वीं JPSC परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में सरकार पहले ही CID से जांच करा रही है. इसके साथ ही JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों से इस्तीफा भी लिया गया है. उन्होंने कहा कि मामले के वित्तीय पहलुओं को देखते हुए सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को भी पत्र भेजा है, ताकि जांच में एजेंसी की भूमिका सुनिश्चित की जा सके. सरकार का कहना है कि अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की जांच गंभीरता से की जा रही है.

14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षा पर रद्द करने की तैयारी

मंत्री ने बताया कि सरकार की ओर से 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और बैकलॉग परीक्षा को रद्द करने की बात भी रखी गई थी. सरकार ने छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए इन परीक्षाओं के संबंध में सकारात्मक रुख अपनाया है. हालांकि, छात्रों की ओर से JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है. इसी मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है.

JSSC CGL रद्द करना संभव नहीं : सरकार

सुदिव्य सोनू ने कहा कि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करना सरकार के लिए फिलहाल संभव नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि यह परीक्षा न्यायिक प्रक्रिया के बाद आयोजित हुई है. परीक्षा से जुड़े मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन किया गया है और इसी कारण सरकार अपने स्तर से परीक्षा रद्द करने का निर्णय नहीं ले सकती. सरकार ने छात्रों के सामने सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से समीक्षा की जा सके. हालांकि, मंत्री के मुताबिक छात्र इस प्रस्ताव पर भी सहमत नहीं हुए.

CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

बैठक के दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार यानी रिफॉर्म को लेकर भी कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए सुधारों पर सहमति जताई है. हालांकि, छात्रों की दो प्रमुख मांगें अब भी बैठक में गतिरोध का कारण बनी हुई हैं. इनमें JSSC CGL मामले की CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग शामिल है. मंत्री ने कहा कि छात्र इन दोनों मुद्दों पर लगातार अड़े हुए हैं. सरकार की ओर से समझाने के बावजूद इस पर सहमति नहीं बन सकी.

न्यायालय के आदेश पर सरकार करेगी कार्रवाई

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यदि JSSC CGL परीक्षा या जांच से जुड़े मामले में न्यायालय की ओर से कोई आदेश आता है, तो सरकार उस पर भी कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है और अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं कर रही है. तीन दिनों तक चली बैठक इसी बात का प्रमाण है कि सरकार समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

आंदोलन खत्म कर संवाद का रास्ता अपनाने की अपील

प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने आंदोलनरत छात्रों और उनके परिजनों से विशेष अपील की. उन्होंने कहा कि छात्र अपना आंदोलन वापस लें और 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को रद्द कर दें. सरकार ने छात्रों की कई मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया है, इसलिए अब आंदोलन जारी रखने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. सुदिव्य सोनू ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के रास्ते आगे भी खुले हुए हैं. उन्होंने कहा कि संवाद के जरिए समस्या का समाधान निकालना आंदोलन के रास्ते से कहीं बेहतर है.

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जिद छोड़ बातचीत जारी रखें छात्र: सुदिव्य

मंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे जिद छोड़कर सरकार के साथ बातचीत जारी रखें. हालांकि, छात्रों की ओर से CBI जांच और JSSC CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर कायम रहने के कारण आंदोलन का अगला रुख अब महत्वपूर्ण हो गया है. सरकार की अपील के बावजूद यदि छात्र विधानसभा घेराव पर आगे बढ़ते हैं, तो 10 अगस्त को राजधानी में आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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