झारखंड में हर घर नल जल योजना की रफ्तार धीमी, 14 पिछड़े प्रखंडों में मात्र 29,433 घरों तक पहुंची पाइपलाइन

Jharkhand Jal Jeevan Mission: झारखंड के 14 पिछड़े प्रखंडों में हर घर नल जल योजना की प्रगति बेहद धीमी है. कुल 3.40 लाख घरों में से केवल 29,433 तक ही पाइपलाइन से पेयजल पहुंचा है. पलामू का मोहम्मदगंज सबसे पीछे है, जबकि सिमडेगा राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.

Jharkhand Jal Jeevan Mission: झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत चल रही हर घर नल जल योजना की प्रगति चिंताजनक है. देश के 100 सबसे पिछड़े प्रखंडों की सूची में झारखंड के 14 प्रखंड शामिल हैं, जहां पेयजल आपूर्ति की स्थिति खराब है. इन 14 प्रखंडों के कुल 3,40,291 घरों में से अब तक मात्र 29,433 घरों तक ही पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल पहुंच सका है. यानी इन क्षेत्रों में औसत प्रगति केवल 8.65 प्रतिशत है.

पलामू का मोहम्मदगंज की स्थिति सबसे बदतर

सबसे बदतर स्थिति पलामू के मोहम्मदगंज प्रखंड की है, जहां 9,823 घरों में से सिर्फ 39 घरों तक ही पानी पहुंच पाया है. योजना के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य के लगभग 27.89 लाख ग्रामीण परिवार आज भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कुल 62.52 लाख घर हैं, जिनमें से अब तक केवल 34.62 लाख घरों (55.38 प्रतिशत) को ही कवर किया जा सका है, जबकि इस योजना का राष्ट्रीय औसत 82.03 प्रतिशत है. इससे झारखंड करीब 26.65 फीसदी पीछे चल रहा है. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना की अवधि दिसंबर 2024 में समाप्त हो गई थी, जिसे केंद्र सरकार ने अब बढ़ाकर 2028 तक विस्तार दिया है.

सिमडेगा सबसे आगे

जिलेवार प्रदर्शन की बात करें तो सिमडेगा की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से भी बेहतर है. सिमडेगा में 92.93 प्रतिशत घरों (1,30,131 में से 1,20,932 घर) तक पानी पहुंचाया जा चुका है. वहीं, रांची, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में प्रगति 70 प्रतिशत से कम है. राज्य में सबसे खराब स्थिति पाकुड़ जिले की है, जहां मात्र 12.85 प्रतिशत और गोड्डा में केवल 19.33 प्रतिशत घरों तक ही नल का जल पहुंच पाया है.

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पिछड़े प्रखंड़ों में नल जल योजना की स्थिति

जिलाप्रखंडकुल घरपानी पहुंचाप्रतिशत
गढ़वाकांडी23617770932.64गढ़वा-कांडी
गढ़वासगमा7433911.22गढ़वा-सगमा
गोड्डामेहेरमा3237226298.12गोड्डा-मेहेरमा
जामताड़ाकरमाटांड210686803.23जामताड़ा-करमाटांड
पाकुड़हिरनपुर200875972.97पाकुड़-हिरनपुर
पाकुड़महेशपुर5787245837.24पाकुड़-महेशपुर
पाकुड़पाकुड़7575459887.9पाकुड़-पाकुड़
पलामूहैदरनगर141942451.73पलामू-हैदरनगर
पलामूमोहम्मदगंज9823390.4पलामू-मोहम्मदगंज
पलामूपिपरा700478610.22पलामू-पिपरा
साहिबगंजमंदरो2107217228.17साहिबगंज-मंदरो
साहिबगंजसाहिबगंज17436199411.44साहिबगंज-साहिबगंज
साहिबगंजतालझरी2135920289.49साहिबगंज-तालझरी
प. सिंहभूमझींकपानी112003142.8प. सिंहभूम-झींकपानी

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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