रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने तेजाब हमला (Acid Attack) पीड़ितों के अधिकारों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि तेजाब से हुए जख्म का दर्द सबके लिए बराबर होता है, इसलिए मुआवजे के मामले में महिला या पुरुष का लिंग भेद करना पीड़ित के साथ घोर अन्याय है. शुक्रवार को जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ (Double Bench) ने तेजाब पीड़ित राहुल कुमार की ओर से दायर अपील याचिका पर यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इसके साथ ही कोर्ट ने मामले को पूरी तरह निष्पादित (Disposed) कर दिया है.
हाईकोर्ट की टिप्पणी: मुआवजा नीति में लिंग भेद उचित नहीं
खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए राज्य सरकार की नीति पर भी सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार की वर्तमान अधिसूचना के तहत पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे में जो लिंग भेद (Gender Discrimination) किया जा रहा है, वह कानूनी और मानवीय दृष्टिकोण से कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता. तेजाब का हमला किसी पर भी हो, उसकी जिंदगी पूरी तरह तबाह हो जाती है. इसी टिप्पणी के साथ खंडपीठ ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता राहुल कुमार को पूर्व में दिए जा चुके 3 लाख रुपये के मुआवजे के अलावा, 15 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा (Additional Compensation) जल्द से जल्द भुगतान करे. इसके साथ ही अदालत ने सरकार को पीड़ित का पूरा और समुचित इलाज सरकारी खर्च पर सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है.
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एकल पीठ के फैसले से संतुष्ट नहीं था पीड़ित
बता दें कि इस संवेदनशील मामले में कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाया गया. मामला यह है कि पीड़ित राहुल कुमार ने इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ (Single Bench) द्वारा दिए गए आदेश को असंतोषजनक बताते हुए इस डबल बेंच में अपील याचिका दायर की थी. दरअसल, एकल पीठ ने अपने आदेश में पीड़ित प्रार्थी को केवल तीन लाख रुपये का मुआवजा देने और सिर्फ आदेश आने की तारीख तक ही इलाज का खर्च उठाने की बात कही थी. राहुल कुमार ने इस राशि को नाकाफी बताते हुए और भविष्य के इलाज की सुरक्षा समेत अन्य सरकारी सुविधाएं पाने के लिए एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी, जिस पर अब हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी है.
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