झारखंड हाईकोर्ट से आलमगीर आलम को झटका, टेंडर कमीशन घोटाले में डिस्चार्ज याचिका खारिज

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज कर दिया है. अदालत ने 37.55 करोड़ रुपये के टेंडर कमीशन घोटाले में पीएमएलए कोर्ट द्वारा आरोप गठन की कार्रवाई को सही माना और कहा कि ईडी के समक्ष दर्ज बयान एक न्यायिक कार्यवाही है. पूरी अदालती रिपोर्ट यहां पढ़ें.

Jharkhand High Court, रांची (सतीश सिंह की रिपोर्ट): झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. झारखंड हाईकोर्ट ने टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने पूर्व मंत्री की डिस्चार्ज पिटीशन (मामले से बरी करने की याचिका) को खारिज कर दिया है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप गठन (फ्रेमिंग ऑफ चार्ज) की कार्रवाई को बिल्कुल सही ठहराया है.

ED के सामने दर्ज बयान सामान्य पुलिसिया जांच नहीं: हाईकोर्ट

याचिका में आलमगीर आलम की ओर से प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे. इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत बयान दर्ज करने की प्रक्रिया एक न्यायिक कार्यवाही (Judicial Proceeding) है, न कि कोई सामान्य पुलिसिया जांच. इसलिए इस बयान पर पूरी तरह विश्वास किया जाना चाहिए. कोर्ट ने साफ किया कि आपराधिक गतिविधियों (Crime) के जरिए कमाए गए काले धन की जांच के दौरान ईडी द्वारा समन भेजना और बयान दर्ज करना पूरी तरह से कानूनी है, क्योंकि यह कार्रवाई पुलिस द्वारा नहीं की जाती है.

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37.55 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कोर्ट में दाखिल चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) में पूर्व मंत्री को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं. इसके मुताबिक आलमगीर आलम जब ग्रामीण विकास मंत्री थे, तब विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले निर्माण कार्यों के टेंडर में बकायदा एक फिक्स ‘सिस्टम’ के तहत ठेकेदारों से कमीशन वसूला जाता था. ईडी की चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे रैकेट और कमीशनखोरी के जरिए कुल 37.55 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई थी.

डायरी के सीक्रेट ‘कोड वर्ड’ से खुली पूर्व मंत्री की पोल

जांच के दौरान ईडी को छापेमारी में कई महत्वपूर्ण डायरियां और नोट बुक मिली थीं. इन डायरियों में कमीशन की वसूली और उसके बंटवारे का पूरा ब्योरा हाथ से लिखा हुआ था. इसके अलावा पैसों के अवैध लेन-देन के लिए खास ‘कोड वर्ड’ का इस्तेमाल किया जाता था. जब ईडी ने इन कोड वर्ड्स की कड़ियां जोड़ीं, तो पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की पहचान साफ तौर पर सुनिश्चित हुई. इन कोड्स के साथ कमीशन की राशि में उनकी हिस्सेदारी का भी स्पष्ट जिक्र था.

वीरेंद्र राम और संजीव लाल ने बयानों में लिया था नाम

मामले के मुख्य आरोपी और सस्पेंडेड चीफ इंजीनियर वीरेंद्र कुमार राम और पूर्व मंत्री के पीएस संजीव लाल ने ईडी को दिए अपने बयानों में सीधे तौर पर आलमगीर आलम की संलिप्तता (शामिल होने) की बात स्वीकार की है. इसके अलावा, विभाग के कई अन्य इंजीनियरों ने भी पूछताछ में टेंडर से जुड़े इस कथित कमीशन वसूली के पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. सभी कानूनी पहलुओं, गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और निचली अदालत (PMLA कोर्ट) की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है.

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Published by: Sameer Oraon

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