शराब जब्ती मामले में पिकअप मालिक को राहत, हाईकोर्ट ने कहा, जब्ती की कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो वाहन छोड़ें

झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध शराब मामले में जब्त पिकअप वाहन के मालिक को बड़ी राहत दी है. जानिए क्या हैं शर्तें और निर्देश.


Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध शराब ढुलाई के मामले में जब्त किए गए एक कमर्शियल पिकअप वाहन के मालिक को बड़ी राहत देते हुए बोकारो की अदालत को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने कहा कि यदि वाहन की जब्ती (Confiscation) की विधिवत कार्रवाई शुरू नहीं हुई है, तो वाहन को निर्धारित शर्तों के साथ मालिक के सुपुर्द किया जाए. अदालत ने यह आदेश पूर्वी सिंहभूम निवासी रितेश प्रधान की याचिका पर 14 सितंबर 2026 को सुनाया.

145 कार्टन शराब के साथ जब्त हुआ था वाहन

मामला पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 18/2026 से जुड़ा है. पुलिस ने वाहन संख्या JH-05-DF-9463 को 145 कार्टन एएनपी प्रीमियम व्हिस्की के अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया था. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और झारखंड आबकारी अधिनियम, 2015 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. रितेश प्रधान ने बताया कि उन्होंने वाहन व्यावसायिक उपयोग के लिए फाइनेंस पर खरीदा था और लंबे समय से खुले आसमान के नीचे खड़े रहने से उसकी हालत खराब हो रही है.

निचली अदालतों ने खारिज कर दी थी याचिका

वाहन छोड़ने की मांग पहले बोकारो के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने 27 मई 2026 को खारिज कर दी थी. इसके बाद सत्र न्यायाधीश ने 27 जून 2026 को आपराधिक पुनरीक्षण याचिका भी खारिज कर दी. सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 का हवाला देते हुए माना था कि वाहन जब्ती योग्य है और आपराधिक अदालत का अधिकार सीमित है.

हाईकोर्ट ने बताई बड़ी कानूनी गलती

हाईकोर्ट ने इस आदेश को कानून के अनुरूप नहीं माना. अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 केवल बिहार राज्य में लागू है और वर्ष 2000 में झारखंड के गठन के बाद यह कानून झारखंड में स्वतः लागू नहीं हो सकता. अदालत ने कहा कि बोकारो के सत्र न्यायाधीश ने बिहार के कानून पर भरोसा कर गंभीर कानूनी त्रुटि की है.

डीसी से मांगी जाएगी जब्ती कार्रवाई की रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने बोकारो के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी को निर्देश दिया कि वह उपायुक्त, बोकारो से रिपोर्ट मंगाएं कि संबंधित वाहन के खिलाफ जब्ती की औपचारिक कार्रवाई शुरू हुई है या नहीं. अदालत ने कहा कि यदि जब्ती की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है, तो वाहन को मालिक के पक्ष में रिलीज किया जाए.

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इन शर्तों पर मिलेगा वाहन

हाईकोर्ट ने वाहन छोड़ने के लिए कई शर्तें भी तय की हैं. याचिकाकर्ता को 9 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति बांड दो सक्षम जमानतदारों के साथ जमा करना होगा. साथ ही मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक वाहन को बेचना, गिरवी रखना या उसका स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा. वाहन की पहचान से किसी प्रकार की छेड़छाड़ भी नहीं की जा सकेगी. इसके अलावा ट्रायल कोर्ट आवश्यक होने पर अन्य शर्तें भी लगा सकेगी. अदालत ने इन निर्देशों के साथ आपराधिक विविध याचिका का निस्तारण कर दिया.

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By Rana pratap

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