रांची से प्रवीण कुमार मुंडा की रिपोर्ट
Jharkhand Delimitation Protest, रांची: झारखंड में लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के संभावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर आदिवासी समाज ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है. इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए रविवार को रांची प्रेस क्लब के सभागार में राज्यभर से आदिवासी प्रतिनिधियों का एक बड़ा जुटान हुआ. बैठक में परिसीमन से जनजातीय समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर होने वाले असर और भावी चुनौतियों पर गहरा मंथन किया गया. आदिवासी नेताओं ने साफ चेताया कि किसी भी कीमत पर झारखंड में आदिवासियों की सीटों को घटने नहीं दिया जाएगा और इसके खिलाफ दिल्ली से लेकर रांची तक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा.
बनेगी ड्राफ्टिंग कमेटी, राहुल गांधी से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
प्रेस क्लब में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में परिसीमन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन और कानूनी लड़ाई को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इसके मुताबिक परिसीमन के तकनीकी और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करने के लिए जनजातीय समाज की एक ‘ड्राफ्टिंग कमेटी’ बनाने पर सहमति बनी है. यह कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) से मुलाकात करेगी और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराएगी. इसके अलावा बैठक में परिसीमन संबंधी गंभीर मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए आगामी 17 जून को रांची में सभी राजनीतिक दलों की एक साझा बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है. साथ ही आदिवासी समाज की ताकत और एकजुटता दिखाने के लिए आगामी 2 अगस्त को रांची में एक विशाल ‘आदिवासी एकता महजुटान रैली’ का आयोजन किया जाएगा.
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दिल्ली में भी होगी बैठक
इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में भी एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी. दिल्ली बैठक की रूपरेखा और तैयारियों का जिम्मा लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत और खूंटी के सांसद कालीचरण मुंडा को सौंपा गया है.
सफल नहीं होने देंगे सीटों को घटाने की साजिश: बंधु तिर्की
परिचर्चा में शामिल झारखंड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने आदिवासी समाज को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य में लोकसभा एवं विधानसभा सीटों के परिसीमन का आदिवासियों के ऊपर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से परिसीमन का सहारा लेकर दूसरे प्रदेशों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या को घटाने की कोशिशें की जा रही हैं, वैसा कोई भी प्रयास हम झारखंड में सफल नहीं होने देंगे. यदि यहां आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों से छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा.”
अनुसूचित क्षेत्र का आधार जनसंख्या नहीं: ग्लैडसन डुंगडुंग
प्रसिद्ध शोधकर्ता और लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग ने परिसीमन के गणित को चुनौती देते हुए कहा कि किसी भी अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) के निर्धारण का आधार वहां की मौजूदा जनसंख्या नहीं, बल्कि उसका ऐतिहासिक आधार होता है. झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र और कई अन्य इलाके विशुद्ध रूप से आदिवासी क्षेत्र हैं और इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण ये अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. ग्लैडसन ने चिंता जताते हुए कहा कि यहां के पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में कभी भी बाहरी जनसंख्या के आगमन को कड़ाई से नहीं रोका गया, जिसके कारण स्थानीय डेमोग्राफी बदली है और आदिवासी आबादी का प्रतिशत कम हुआ है.
बाहरी आबादी बढ़ने और आदिवासियों के पलायन पर चिंता
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ता वाल्टर कंडुलना ने कहा कि हमने अनुसूचित क्षेत्र की मूल अवधारणा को छोड़कर राजक्षेत्र की अवधारणा को अपना लिया, जिससे नुकसान हुआ. सामान्य कानून लागू होने की वजह से यहां बाहरी जनसंख्या तेजी से बढ़ी और स्थानीय आदिवासियों के पलायन की वजह से उनकी संख्या में कमी आई है. वहीं, शशि पन्ना ने इस बैठक को समाज के अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया. इस वैचारिक परिचर्चा में दयामनी बरला, वासवी किड़ो, आलोका, रमा खलखो, अनिल पन्ना, रामचंद्र उरांव, अजय सिंह चेरो सहित राज्यभर से आए कई अन्य प्रबुद्ध वक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखे और आंदोलन को धार देने का संकल्प लिया.
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