राष्ट्रीय सेमिनार में एनईपी-2020 पर विमर्श
रांची: केंद्रीय विश्वविद्यालय का वाणिज्य और वित्तीय अध्ययन विभाग (डीसीएफएस) आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस सेमिनार में 100 से अधिक शिक्षाविद् और उद्योग जगत के एक्सपर्ट शामिल हुए. उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर आलोक चक्रवाल (कुलपति, गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय) ने एनईपी 2020 की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र और व्यापार, वाणिज्य और समाज में उनके योगदान का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत वाणिज्य और अर्थशास्त्र को लेकर पूरे विश्व को ज्ञान का प्रकाश सदियों से देते आ रहा है. झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो केबी दास ने अपने अध्यक्षीय भाषण में एनईपी 2020 के कार्यान्वयन में सीयूजे की पहल को सूचीबद्ध किया. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का वाणिज्य और व्यवसाय के मॉडल पाठ्यक्रम के विकास में प्रतिबिंब होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में एनईपी भारत की शिक्षा प्रणाली को सुदृढ करने का काम कर रहा है. युवाओं को सिर्फ किताबी तौर पर शिक्षित करने के बजाय सामाजिक औऱ आर्थिक रूप से भी ज्ञानवान बनाना होगा. मुख्य वक्ता प्रोफेसर रवि नारायण कर ने कहा कि वाणिज्य और व्यवसाय के लिए पाठ्यक्रम के विकास में प्राचीन भारतीय पाठ के पहले से ही छिपे खजाने की आवश्यकता है. प्रो एके महापात्र ने कहा कि बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए जनशक्ति की जरूरत बढ़ रही है. विभाग के अध्यक्ष एवं डीन डॉ बटेश्वर सिंह ने इन सभी अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम में प्रोफेसर जीपी सुधाकर, सीईएसएस, बेंगलुरु, हृषिकेश सोमन, दिल्ली विश्वविद्यालय से मिनाक्षी कर, जौनपुर विश्वविद्यालय से अजय द्विवेदी, पवनेश, एमजीसीयू, डॉ शशि सिंह, डॉ प्रणय, डॉ अजय, पीआरओ नरेंद्र कुमार, महेंद्र, नीतेश शामिल थे.