Jharkhand Teacher Recruitment Case, रांची, (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के मामले में अपनी सख्त टिप्पणी से सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिक्त पड़े 2034 पदों पर नियुक्ति न होने के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अविलंब कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
एक सितंबर के आदेश की अनदेखी पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार और JSSC से पूछा कि 1 सितंबर 2025 को पारित आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं किया गया? उल्लेखनीय है कि एकल पीठ ने सरकार को 6 माह के भीतर इन 2034 रिक्त पदों पर याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति का आदेश दिया था. निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद मनोज कुमार गुप्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर की है.
अपील याचिका का दिया गया हवाला
प्रतिवादियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 26 सितंबर 2025 को अपील याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी गई है, जिस पर फिलहाल सुनवाई चल रही है. हालांकि, अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और एकल पीठ के आदेश का अनुपालन करने के लिए प्रतिवादियों को अतिरिक्त समय दिया है.
3 जुलाई तक की डेडलाइन
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 जुलाई की तिथि निर्धारित की है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि 3 जुलाई से पहले आदेश का पालन नहीं किया गया, तो अदालत कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होगी. इस मामले में सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता और चंचल जैन ने पक्ष रखा, जबकि JSSC का पक्ष अधिवक्ता संजय पिपरावाल व प्रिंस कुमार ने प्रस्तुत किया.
