EXPLAINER: झारखंड समेत इन राज्यों में होती हैं मानव तस्करी की सबसे ज्यादा घटनाएं, जानें अपने राज्य का हाल

Human Trafficking News: झारखंड के लिए अच्छी बात यह है कि मानव तस्करी की घटनाओं में यहां कमी दर्ज की गयी है. वर्ष 2019 में झारखंड में 177 केस सामने आये थे, जबकि वर्ष 2020 में 140 मानव तस्करी से जुड़े केस दर्ज किये गये. वर्ष 2021 में झारखंड में पिछले तीन साल में सबसे कम सिर्फ 92 मामले सामने आये.

Human Trafficking News: देश के जिन 10 राज्यों में मानव तस्करी की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं, अपना झारखंड (Jharkhand News) में भी उसमें शामिल है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau- NCRB 2021) के लेटेस्ट आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग (Human Trafficking in India) के 81.36 फीसदी मामले सिर्फ 10 राज्यों से आते हैं.

झारखंड में मानव तस्करी की 4.2 फीसदी घटनाएं

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, मानव तस्करी के जितने मामले पूरे देश में सामने आते हैं, उनमें से 4.2 फीसदी घटनाएं झारखंड (Human Trafficking in Jharkhand) में होती हैं. वर्ष 2021 की एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि 2,189 मानव तस्करी के केस देश भर में दर्ज किये गये. 56.6 फीसदी यानी 1,239 केस सिर्फ 5 राज्यों (तेलंगाना, महाराष्ट्र, असम, केरल और आंध्रप्रदेश) से आये. 44 फीसदी केस (408) बाकी राज्यों में रिकॉर्ड किये गये.

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तेलंगाना में सबसे ज्यादा होती है मानव तस्करी

आंकड़े बताते हैं कि तेलंगाना में सबसे ज्यादा 347 मानव तस्करी की घटनाएं वर्ष 2021 में दर्ज की गयीं. दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र रहा, जहां से 320 केस सामने आये. असम में 203, केरल में 201 और आंध्रप्रदेश में 168 मानव तस्करी के केस वर्ष 2021 में दर्ज किये गये. टॉप-5 राज्यों के बाद ओड़िशा में 136, बिहार में 111, उत्तर प्रदेश में 103, राजस्थान में 100 और झारखंड में 92 केस पुलिस ने रिकॉर्ड किये.

झारखंड में मानव तस्करी के मामले घटे

झारखंड के लिए अच्छी बात यह है कि मानव तस्करी की घटनाओं में यहां कमी दर्ज की गयी है. वर्ष 2019 में झारखंड में 177 केस सामने आये थे, जबकि वर्ष 2020 में 140 मानव तस्करी से जुड़े केस दर्ज किये गये. वर्ष 2021 में झारखंड में पिछले तीन साल में सबसे कम सिर्फ 92 मामले सामने आये. यहां मानव तस्करी के 55.9 फीसदी मामलों में पुलिस की ओर से चार्जशीट पेश की जाती है, जो अन्य मानव तस्करी के लिए बदनाम राज्यों की तुलना में कम है. चार्जशीट के मामले में जम्मू-कश्मीर, मेघालय से बेहतर रिकॉर्ड झारखंड का है. हालांकि, मेघालय या जम्मू-कश्मीर में मानव तस्करी की घटनाएं भी बेहद कम होती हैं.

मानव तस्करी के मामलों में 27.7 फीसदी की वृद्धि

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि भारत में वर्ष 2020 में मानव तस्करी की 1,714 घटनाएं हुईं थीं, जबकि वर्ष 2021 में 2,189 मामले सामने आये. इस तरह मानव तस्करी के मामलों में 27.7 फीसदी की वृद्धि हुई है. कुल 6,533 लोग तस्करी के शिकार हुए. इसमें 2,877 बच्चे और 3,656 लोगों को मानव तस्करों ने अपना शिकार बनाया. इनमें से 6,213 पीड़ितों को मानव तस्करों के चंगुल से बचा लिया गया. वर्ष 2021 में 2,189 मानव तस्करी की घटनाएं हुईं, जिसमें 5,755 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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