थर्मल पावर प्लांट में अब एफजीडी लगाना अनिवार्य नहीं, पर्यावरण पर पड़ेगा असर

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कोयला आधारित बिजली घरों (थर्मल पावर प्लांट) में फ्यूल गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) तकनीक लगाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है.

रांची. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कोयला आधारित बिजली घरों (थर्मल पावर प्लांट) में फ्यूल गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) तकनीक लगाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है. इससे पर्यावरण के बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है. एफडीजी तकनीक से सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ-2), महीन धूलकण (पीएम 2.5) और पारे जैसी खतरनाक गैसों को कम किया जाता है. इससे सीमेंट उद्योग में काम आने वाला जिप्सम भी तैयार किया जा सकता है. इससे झारखंड को ज्यादा नुकसान हो सकता है. झारखंड में करीब एक दर्जन से अधिक थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं. भारत दुनिया में सल्फर डाइऑक्साइड का सबसे बड़ा उत्सर्जक देश है. विश्व में मानव जनित सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. इसमें भी कोयला आधारित पावर प्लांट्स की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है. देश में जलाये जाने वाले कुल कोयले का 70 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं संयंत्रों में उपयोग होता है.

वर्ष 2025 में किया गया था अनिवार्य

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषक मनोज कुमार ने बताया कि वर्ष 2015 में जारी उत्सर्जन मानकों के तहत पावर प्लांट्स में सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए एफडीजी तकनीक को अनिवार्य किया गया था. जुलाई 2025 की अधिसूचना के जरिये अब इन नियमों को कमजोर कर दिया गया है. वन एवं पर्यावरण विभाग के ताजा निर्णय के अनुसार, श्रेणी ””””सी”””” के पावर प्लांट्स को अब उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने से पूरी तरह छूट मिल गयी है. झारखंड के सभी पावर प्लांट इसी श्रेणी में आते हैं.

झारखंड के पावर प्लांट्स को बड़े पैमाने पर छूट

राज्य में कुल 13 थर्मल पावर यूनिट्स हैं, जिनकी कुल क्षमता 4,250 मेगावाट है. 13 पावर प्लांट यूनिट्स में से केवल दो यूनिट्स (जो केंद्र सरकार के स्वामित्व में है) में एफजीडी तकनीक लगायी गयी है. राज्य सरकार के स्वामित्व वाले किसी भी पावर प्लांट में अभी तक एफजीडी तकनीक लागू नहीं की गयी है.

खराब दौर से गुजर रही है झारखंड में वायु गुणवत्ता

आइआइटी दिल्ली ने भारत के सभी वायुमंडलीय क्षेत्रों (एयरशेड्स) में पावर प्लांट्स के प्रभाव का आकलन किया है. इसमें पाया गया कि झारखंड के एयरशेड्स में कुल प्रदूषण का तीन से आठ प्रतिशत योगदान पावर प्लांट्स का है. आइआइटी बॉम्बे ने शहर स्तर पर विश्लेषण करते हुए पाया कि रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण का चार से 24 प्रतिशत हिस्सा पावर सेक्टर से आता है.

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Published by: Praveen

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