ओडिशा में धीरज साहू के ठिकाने से कितने रुपए मिले, आयकर विभाग ने कर दिया खुलासा, ऐसी-ऐसी जगहों पर छिपाए थे पैसे

सीबीडीटी ने कहा है कि जब्त किये गये सबूतों के प्रारंभिक विश्लेषण से देसी शराब की बिना हिसाब की बिक्री के रिकॉर्ड, अघोषित नकदी प्राप्तियों के विवरण और बेहिसाबी नकदी के लेन-देन के संदर्भों का पता चलता है.

झारखंड के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के झारखंड, बंगाल और ओडिशा के ठिकानों से मिले नकदी के ढेर में कितने रुपए थे, इस बात का खुलासा हो गया है. आयकर विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि धीरज साहू के रिश्तेदारों के ठिकानों से तलाशी अभियान के बाद 351 करोड़ रुपए और 2.80 करोड़ रुपए मूल्य के आभूषण मिले थे. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने बृहबस्पतिवार (21 दिसंबर) को यह जानकारी दी. हालांकि, बोर्ड ने किसी का नाम नहीं लिया. बिना किसी का नाम लिए एक बयान में आयकर विभाग ने कहा कि समूह का व्यवसाय झारखंड के रांची स्थित एक परिवार द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस परिवार का एक सदस्य ‘राजनीति से जुड़ा एक व्यक्ति’ है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि यह कार्रवाई कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू के परिवार से जुड़े बौध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड (बीडीपीएल) के खिलाफ ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 10 जिलों में 30 से अधिक परिसरों में छह दिसंबर को शुरू किये गये तलाशी अभियान से जुड़ी थी. 10 दिन तक चली तलाशी के दौरान रांची स्थित साहू के परिवार के घर पर भी आयकर विभाग ने छापा मारा.

सीबीडीटी ने बयान में कही ये बात

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 64 वर्षीय राज्यसभा सांसद धीरज साहू के हवाले से कहा गया है कि नकदी का कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. वह हर चीज का हिसाब देंगे. उन्होंने कहा था कि यह पैसा उनके पारिवारिक बिजनेस का है. इधर, सीबीडीटी ने कहा है कि जब्त किये गये सबूतों के प्रारंभिक विश्लेषण से देसी शराब की बिना हिसाब की बिक्री के रिकॉर्ड, अघोषित नकदी प्राप्तियों के विवरण और बेहिसाबी नकदी के लेन-देन के संदर्भों का पता चलता है. इसने कहा कि तलाशी अभियान के दौरान सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि समूह शराब कारोबार से अर्जित आय को बड़े पैमाने पर छिपाने में लगा हुआ है.

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धीरज साहू ने कहा था- मैं शर्मिंदा हूं

उल्लेखनीय है कि छापेमारी की कार्रवाई खत्म होने के बाद कांग्रेस नेता धीरज साहू ने कहा था कि उनके करीब चार दशक के राजनीतिक करियर में कभी ऐसा नहीं हुआ. इसके लिए वह शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा था कि ये पैसे उनके पारिवारिक व्यवसाय के हैं. इसका वह हिसाब देंगे. इससे पहले, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि धीरज साहू के परिजनों के ठिकानों से मिले पैसे से कांग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. धीरज साहू और उनके परिवार को इस बारे में जवाब देना चाहिए.

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जीर्ण-शीर्ण इमारतों में मिले 329 करोड़ रुपए

सीबीडीटी ने बताया है कि 351 करोड़ रुपए में से 329 करोड़ रुपए जीर्ण-शीर्ण इमारतों, खाली और छिपे हुए चैंबरों में छिपाकर रखे गए थे. एक मकान को खोदकर उसमें से रुपए निकाले गए. ये पैसे ओडिशा के बोलांगिर जिले के छोटे नगरों सूडापाड़ा और टिटलागढ़ एवं संबलपुर के खेतराजपुर से बरामद हुए थे.

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