ट्यूशन पढ़ाकर भाई-बहन को पढ़ाया, दोनों ने 10वीं में किया स्कूल टॉप, खुद भी कॉमर्स में स्टेट टॉपर बने ‘शुभम’

वाणिज्य संकाय में रांची के शुभम कुमार ठाकुर ने स्टेट टॉप किया है. उनकी उपलब्धि पर माता-पिता भी काफी खुश हैं. शुभम भविष्य में चार्टड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं.

रांची: झारखंड 12वीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया. वाणिज्य संकाय में रांची के शुभम कुमार ठाकुर ने स्टेट टॉप किया है. उनकी उपलब्धि पर माता-पिता भी काफी खुश हैं. शुभम भविष्य में चार्टड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं. उनकी सफलता, परीक्षा की तैयारी, निजी जिंदगी और भविष्य की योजनाओं पर प्रभात खबर संवाददाता सूरज ठाकुर ने शुभम से बात की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश.

Q. शुभम, आपको बहुत बधाई. आप इंटर कॉमर्स में स्टेट टॉपर बने हैं. कैसा लग रहा है?

शुभम: जी शुक्रिया. बहुत अच्छा लग रहा है. मैंने सोचा था कि अच्छे अंक हासिल करूंगा. लेकिन जब पता चला कि मैं कॉमर्स स्ट्रीम में स्टेट टॉपर हूं तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मेरे माता-पिता भी मेरी इस सफलता पर काफी खुश हैं.

Q. आपने परीक्षा की तैयारी कैसे की. सभी विषयों को लेकर क्या रणनीति अपनाई?आपने परीक्षा की तैयारी कैसे की. सभी विषयों को लेकर क्या रणनीति अपनाई?

शुभम: मैंने प्रतिदिन 2 से 3 घंटे रेगुलर पढ़ाई की. विषय के हिसाब से शेड्यूल बनाया और तमाम सब्जेक्ट का बराबर समय दिया. मेरी सोच ये थी कि किसी दो या तीन विषय में ज्यादा मार्क्स ले आने की बजाय सभी विषयों में बराबर अंक हासिल किये जायें.

मैंने परीक्षा से कुछ समय पहले क्वेश्चन बैंक लिया था. उसमें से पिछले वर्षों में आये सवालों का रिवीजन करता था. बीते वर्षों में पूछे गये अहम सवालों की तैयारी करता था. जो भी कन्फ्यूजन हो उसे दोस्तों के साथ ग्रुप स्टडी में क्लियर कर लेता था.

Q. ज्यादातर लोग कहते हैं कि उन्होंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की. पर आपका कहना है कि केवल 3 से 4 घंटे ही पढ़ाई की.

शुभम: सर, इसमें दो बाते हैं. मुझे लगता है कि यदि पढ़ाई में निरंतरता है तो कॉलेज में नियमित क्लास अटेंड करने के बाद 3 से 4 घंटे काफी होते हैं. इसकी दूसरी वजह ये भी है कि मेरे पास इससे ज्यादा वक्त नहीं होता था सेल्फ स्टडी के लिये. कॉलेज सुबह साढ़े छह बजे शुरू हो जाता था. छुट्टी में वापस घर लौटते हुये 1 बज जाते थे.

खाना खाने के बाद मैं अलग-अलग समय में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. पहले 10वीं क्लास के बच्चों को ट्यूशन देता था और फिर जूनियर क्लास के बच्चों को पढ़ाता था. इसलिये मुझे सेल्फ स्टडी के लिये केवल 3 से 4 घंटे ही मिल पाते थे.

Q. आपने कहा कि आप बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे. इसकी क्या वजह रही. शौक है या फिर आर्थिक सपोर्ट के लिये?

शुभम: मेरे घर में केवल पापा ही कमाने वाले हैं. वो एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइजर हैं. लेकिन लॉकडाउन की वजह से कमाई कम हो गयी है. मां की तबीयत अक्सर खराब रहती है. इसलिये मुझे लगा कि फैमिली को भी सपोर्ट करना चाहिये. ट्यूशन पढ़ाने से जो पैसे मिले, मैंने उससे अपने छोटे-भाई बहन को पढ़ाया. दोनों ने 10वीं की परीक्षा में इस बार स्कूल टॉप किया है. ट्यूशन के पैसों से मैंने अपनी किताब-कॉपी और छोटी-मोटी फीस का खर्चा भी उठाया.

Q. आप अपनी इस सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे और क्यों?

शुभम: मैं अपनी सफलता का श्रेय सबसे पहले अपने माता-पिता को देना चाहूंगा. उन्होंने आर्थिक और भावनात्मक स्तर पर मेरा काफी सहयोग किया. आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद कभी पढ़ाई से नहीं रोका. मैं दसवीं बोर्ड परीक्षा में स्कूल टॉपर था. सब कहते थे कि मैं साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करूं. मेरी उसमें रूचि नहीं थी. तब मेरे पिता ने कहा कि मेरी जिसमें रूचि है मुझे वही पढ़ना चाहिये.

मेरे पिता ने भी कॉमर्स से पढ़ाई की है. उनसे भी काफी सहयोग मिला. मेरी मां किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं. उनका इलाज काफी महंगा है, लेकिन उन्होंने अपना इलाज करवाने से मना कर दिया ताकि हमारी पढ़ाई पर कोई आंच ना आये.

कॉलेज में शिक्षकों और सहपाठियों का काफी सहयोग मिला. मुझे जब भी जरूरत थी उन्होंने मदद किया. मेरे डाउट्स क्लियर किये. दोस्तों के साथ ग्रुप स्टडी का भी फायदा मुझे मिला.

Q. आगे का क्या प्लान है और जिंदगी में क्या बनना चाहते हैं?

शुभम: मैंने संत जेवियर्स कॉलेज रांची से ग्रेजुएशन करने का सोचा है. साथ ही सीए की तैयारी करना चाहता हूं. मैं चार्टड अकाउंटेंट बनना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि एक दिन अपने परिवार की मूलभूत समस्याएं दूर करूं. उन्हें वो तमाम सुविधायें दूं जिसका उन्होंने हमारी पढ़ाई के लिये त्याग किया है. हालांकि, थोड़ा चिंतित हूं क्योंकि सीए की तैयारी काफी महंगी होती है.

Q. सरकार से किसी तरह की सहायता की आशा है आपको?

शुभम: जी, हमारा परिवार अभी भी किराये के मकान में रहता है. पापा एकमात्र कमाने वाले हैं. यदि हमें सरकारी योजना के तहत मकान मिल जाये तो बहुत राहत होगी. इसके अलावा मैं ये भी चाहता हूं कि सरकारी स्तर पर, किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही मेरी मां का इलाज करवा दिया जाये. इलाज काफी मंहगा है और हमारा परिवार वो खर्च उठा पाने में असमर्थ है.

Posted By- Suraj Kumar Thakur

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Published by: Surajkumar thakur

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