Hera Panchami : रथयात्रा महोत्सव के दौरान मनायी जाने वाली रथ पंचमी (हेरा पंचमी) रविवार को श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनायी जायेगी. सुबह नौ बजे मां लक्ष्मी की प्रतिमा श्री मंदिर (मुख्य मंदिर) से मौसीबाड़ी स्थित रथ के पास लायी जायेंगी. यहां परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के रथ का एक पहिया प्रतीकात्मक रूप से तोड़ेंगी और फिर वापस श्री मंदिर लौट जायेंगी.
हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा
मान्यता है कि रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा मौसीबाड़ी चले जाते हैं, लेकिन मां लक्ष्मी को साथ नहीं ले जाते. इसी नाराजगी के प्रतीक के रूप में हेरा पंचमी पर मां लक्ष्मी रथ का पहिया तोड़ती हैं. इसके बाद लोहरा समाज के लोग परंपरा के अनुसार रथ के पहिये की मरम्मत करते हैं. इसी रथ से भगवान घुरती रथ यात्रा के दिन श्री मंदिर लौटते हैं. लौटने पर मां लक्ष्मी पहले मंदिर का द्वार नहीं खोलतीं. बाद में मान-मनौव्वल की रस्म के बाद भगवान को मंदिर में प्रवेश कराया जाता है. शनिवार को अवकाश होने के कारण मौसीबाड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे.
बारिश के बावजूद मेले में उमड़ी भीड़
बारिश के बावजूद शनिवार को रथ मेला पूरी रौनक पर रहा. बड़ी संख्या में लोगों ने मेले का आनंद लिया और घरेलू सामान, शंख, साड़ियां, मछली पकड़ने के जाल, लोहे के औजार और तलवार जैसी वस्तुओं की खरीदारी की. लोगों ने विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया और झूलों का भी भरपूर आनंद उठाया.
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