Ranchi news : एचइसी कर्मियों ने खाते से लोन की इएमआइ नहीं काटने का किया आग्रह

एचइसी कर्मियों ने एसबीआइ हटिया को लिखा पत्र. जून 2023 से एचइसी लोन की इएमआइ नहीं भेज रहा बैंक. वेतन के अभाव में हो रही है परेशानी.

रांची. अनियमित वेतन मिलने से एचइसी कर्मी पिछले तीन वर्षों से परेशान हैं. ऐसे में एचइसी कर्मियों ने एसबीआइ हटिया को पत्र लिख कर सेविंग एकाउंट से लोन की इएमआइ नहीं काटने का आग्रह किया है. कर्मियों का कहना है कि सभी का पर्सनल लोन बैंक से है. एचइसी कर्मियों के वेतन से इएमआइ की राशि काट कर बैंक को भेजता था. लेकिन, जून 2023 से एचइसी लोन की इएमआइ बैंक को नहीं भेज रहा है. जबकि, कर्मियों के वेतन स्लिप में हर माह इएमआइ कट रही है. अब अगर कभी एकाध माह का वेतन एकाउंट में जाता भी है, तो बैंक कर्मियों के सेविंग एकाउंट पर होल्ड लगा देता है और अपनी इएमआइ काट लेता है. इस कारण वेतन जाने के बाद भी स्थिति दयनीय बनी रहती है.

कर्मियों ने कहा : बैंक एचइसी से वसूले राशि

कर्मियों का कहना है कि एचइसी की गारंटी पर लोन दिया गया है, तो फिर बैंक को एचइसी से ही वसूलना चाहिए. कर्मी नियमित वेतन नहीं मिलने से पहले ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं. यदि ऐसे समय में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है. पत्र पर विमल कुमार महली, पीके सिन्हा, संतोष कुमार सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं.

एचइसी को एनइसीएल से मिले 72 करोड़, यूनियन ने प्रबंधन से वेतन भुगतान की मांग की

रांची. आर्थिक संकट से जूझ रहे एचइसी को एसइसीएल से मार्च व अप्रैल माह में करीब 72 करोड़ रुपये मिले हैं. इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि एसइसीएल से प्रोजेक्ट डिविजन के लिए किये गये कार्य व कुछ राशि अग्रिम दी गयी है, जिसे प्रोजेक्ट के कार्य में ही खर्च करने की योजना है. वहीं, हटिया कामगार यूनियन के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने कहा कि एसइसीएल से एचइसी को आठ अप्रैल को 44.48 करोड़ व 07 मार्च को 27.73 करोड़ रुपये मिले हैं. उन्होंने मांग की है कि प्रबंधन इस राशि में से कम से कम दो माह के बकाया वेतन का भुगतान करे. साथ ही अस्थायी कर्मियों के लिए इएसआइ की सुविधा व कार्यशील पूंजी के लिए राशि आवंटित करे. उन्होंने कहा कि प्रबंधन कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं करना चाहता है. जबकि, एसइसीएल प्रोजेक्ट में भी एचइसी कर्मी ही कार्य कर रहे हैं. मालूम हो कि एचइसी कर्मियों का 26 माह का वेतन बकाया है.

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Published by: Rajiv kumar

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