रांची: आजसू पार्टी ने जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्ति परीक्षाओं में अनियमितता के मामले को लेकर आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के साथ टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की मांग सरकार से की है. पार्टी ने कहा कि विद्यार्थी पिछले 19 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करने के बजाय सरकार को उनकी मांगों और शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए.
हरमू स्थित पार्टी कार्यालय में केंद्रीय महासचिव लंबोदर महतो, केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत और केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने छात्रों के आंदोलन, प्रशासनिक कार्रवाई और भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की सलाह दी. नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए और इस पूरे मामले को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानकर नहीं देखना चाहिए. यह युवाओं के भविष्य और सरकार के प्रति उनके भरोसे से जुड़ा सवाल है.
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15 अगस्त से पहले बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई से बचने की मांग
आजसू नेताओं ने कहा कि 15 अगस्त से पहले छात्रों को बलपूर्वक हटाकर आंदोलन समाप्त कराने जैसी किसी भी कार्रवाई से सरकार को बचना चाहिए. शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई या आंतरिक जांच से युवाओं के मन में पैदा हुए संदेह दूर नहीं होंगे. नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर हजारों युवाओं के मन में सवाल हैं और सरकार को इन सवालों का स्पष्ट एवं विश्वसनीय जवाब देना होगा.
निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग
नेताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व केवल आंदोलन समाप्त कराना नहीं, बल्कि उस कारण का समाधान करना है, जिसके चलते युवा सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं. सरकार को छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए. छात्रों को हटाने या आंदोलन को दबाने की कोशिश करने के बजाय सरकार को उनके बीच जाकर उनकी बात सुननी चाहिए. किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन के खिलाफ जबरदस्ती या दमनात्मक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है. पार्टी ने इस मामले को लेकर सरकार के समक्ष छह सूत्री मांगें रखीं.
