खुशखबरी! झारखंड के सबसे बड़े मेले में खादी के कपड़ों पर मिलेगा बंपर डिस्काउंट, हेमंत सोरेन करेंगे उद्घाटन

झारखंड खादी ग्रामोद्योग के सीईओ ने कहा कि जितने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम 7 जनवरी से 12 जनवरी 2024 तक आयोजित किए जाएंगे, वे सभी मुख्य स्टेज पर होंगे. इस स्टेज का नाम भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर रखा गया है.

खादी प्रेमियों के लिए खुशखबरी है. झारखंड की राजधानी रांची में रविवार (7 जनवरी) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव 2023-24 का उद्घाटन करेंगे. उद्घाटन समारोह शाम चार बजे होगा. झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के इस आयोजन में झारखंडी व्यंजन से लेकर राजस्थानी, बिहारी एवं अन्य राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजन लोगों का जायका बढ़ाएंगे. झारखंड के वीर पुत्र बिरसा मुंडा के नाम पर मुख्य स्टेज सभागार होगा, तो महात्मा गांधी की जीवनी पर आधारित गांधी संग्रहालय भी होगा. महोत्सव में खादी के परिधानों पर 25 फीसदी का बंपर डिस्काउंट मिलेगा. वस्त्रों पर भी 20 फीसदी की छूट मिलेगी. महोत्सव की शुरुआत नृत्य नाटिका ‘गांधी यात्रा’ से होगी. महोत्सव में 8 सेक्शन में कुल 300 स्टॉल होंगे. अलग-अलग सेक्शन का नाम झारखंड के प्रमुख फैब्रिक्स के नाम पर होगा. खादी मेला में आने वाले लोगों के लिए ऑन द स्पॉट हेल्थ चेकअप कैंप भी लगाया जाएगा. मेले में कारपेट एरिया में कालीन, फर्नीचर और कुकरी आइटम्स होंगे. एडवेंचर के लिए एम्यूजमेंट पार्क भी होगा. झारखंड खादी बोर्ड के सीईओ राखाल चंद्र बेसरा ने शनिवार (6 जनवरी) को यह जानकारी दी.

सरस की ओर से मेले में लगाए जाएंगे 120 स्टॉल

उन्होंने बताया कि झारखंड की राजधानी रांची में लगने वाले इस सबसे बड़े मेले में कई सरकारी स्टॉल भी लगेंगे, जिसमें एसबीआई, जेएसएलपीएस, मुख्यमंत्री लघु कुटीर उद्योग, झारक्राफ्ट, रेशम हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प निदेशालय शामिल होंगे. खादी बोर्ड के सीईओ ने पत्रकारों को बताया कि आम जनों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी महोत्सव में दी जाएगी. उन्होंने बताया कि महोत्सव में लगभग 120 स्टॉल सरस की ओर से लगाए जाएंगे. यूआईडीएआई, मुख्यमंत्री लघु कुटीर उद्योग, रेशम हस्तकरघा और हस्तशिल्प निदेशालय, झारक्राफ्ट एवं अन्य सरकारी स्टॉल भी राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव में शामिल हो रहे हैं.

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महात्मा गांधी की जीवनी पर गांधी संग्रहालय

खादी की पहचान महात्मा गांधी से है. इसलिए इस बार भी राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव महात्मा गांधी को समर्पित किया गया है. महात्मा गांधी के जीवन के पहलुओं को समेटते हुए एक गांधी संग्रहालय बनाया गया है. संग्रहालय महात्मा गांधी के विचारों और खादी के प्रति उनके लगाव को प्रदर्शित करेगा.

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मुख्य स्टेज सभागार बिरसा मुंडा के नाम

झारखंड खादी ग्रामोद्योग के सीईओ ने कहा कि जितने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम 7 जनवरी से 12 जनवरी 2024 तक आयोजित किए जाएंगे, वे सभी मुख्य स्टेज पर होंगे. इस स्टेज का नाम भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर रखा गया है. इन कार्यक्रमों में पारंपरिक लोक नृत्य, गायन एवं वादन, हिंदी गायन, नृत्य नाटिका, आधुनिक फोक सांग एवं बैंड शामिल हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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